Due to moisture many farmers are not getting full MSP
- फोटो : Kaithal
जिले की मंडियों में सभी मिलर्स को खरीद करने की छूट मिलने व बैंक गारंटी को लेकर सरकार द्वारा नियमों में संशेधान के बाद बुधवार को मिलर्स ने विधिवत रुप से धान की खरीद शुरू कर दी। जिससे किसानों ने राहत की सांस ली है। नई अनाज मंडी, पुरानी अनाज मंडी व विस्तार अनाज मंडी में बुधवार को जमकर सरकारी खरीद हुई। मौसम को देखते हुए किसानों की फसल तो बिक गई। लेकिन नमी ज्यादा होने के कारण काफी संख्या में किसानों को पूरा एमएसपी नहीं मिलने की बात सामने आई है।
विदित रहे कि तीन दिन से धान की सरकारी खरीद ठीक ढंग से शुरू नहीं हो पा रही थी। मिलर्स हड़ताल पर चल रहे थे। चीका सहित अन्य मंडियों में खरीद चल रही थी। लेकिन कैथल मंडी में मिलर्स खरीद नहीं कर रहे थे। जिस कारण मंगलवार को डीसी प्रदीप दहिया ने जिले की अन्य मंडियों के मिलर्स को भी कैथल मंडी में खरीद की अनुमति प्रदान कर दी। इस अनुमति के मिलते ही मंगलवार को चीका के मिलर्स ने कैथल में जमकर खरीद की थी। उधर, सरकार ने हड़ताल कर रहे मिलर्स की 5 प्रतिशत बैंक गारंटी वापस लेने की मांग को लेकर नियमों में संशोधन कर दिया। जिस कारण मिलर्स ने कैथल में खरीद शुरू कर दी।
नई अनाज मंडी में धान बेच चुके खुराना के एक किसान ने कहा कि उनकी धान 1750 रुपये में बिकी है। इसमें नमी थोड़ा ज्यादा थी। कुछ इसका रंग भी खराब था। लेकिन उन्हें दुख इस बात का है कि यह धान सरकारी रेट 1960 रुपये में कागजों में दर्ज होगी। जिस रेट पर किसान की धान की खरीद हो, उसी रेट पर इसे कागजों में दर्ज किया जाए। मंडी में काफी संख्या में किसानों को 1700 से 1850 रुपये प्रति क्विंटल तक धान की कीमत दी गई। लेकिन किसान खराब मौसम के कारण कम कीमत पर भी किसी तरह से अपनी धान बेचकर आगे की फसल की संभाल लेने पर मजबूर हैं।
गेटपास की धीमी प्रक्रिया, कैबिन पर लगाया ताला-विस्तार अनाज मंडी में गेटपास की धीमी प्रक्रिया होने के कारण किसानों ने गेटपास काट रहे कर्मचारी को बाहर निकाल कर कैबिन पर ताला लगा दिया। इसके बाद मार्केट कमेटी सचिव सतबीर राविश मौके पर पहुंचे। उन्होंने यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर किसानों की समस्या का समाधान कर दिया।
किसानों व आढ़तियों के हित को देखते हुए आंशिक रुप से लिया खरीद का फैसला-सचिन मित्तल
कैथल। राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सचिन मित्तल ने कहा कि किसानों व आढ़तियों के हितों को देखते हुए मिलर्स ने खरीद का फैसला लिया है। बुधवार को मिलर्स ने खरीद की है। सरकार ने 5 प्रतिशत बैंक गारंटी के फैसले पर जिस मिलर की मिल खुद की है और उसने पिछले सीजन में समय पर चावल जमा करवा दिए थे। उसे 4 प्रतिशत की छूट देते हुए उसके लिए बैंक गारंटी 1 प्रतिशत कर दी है। जो मिलर ठेके पर लेकर मिल चला रहा है। उसे ढाई प्रतिशत बैंक गारंटी देनी होगी। आंशिक रुप से मिलर्स ने खरीद शुरू कर दी है। उनकी मांग जारी है। सरकार के साथ इस बैंक गारंटी को पूरी तरह से समाप्त किए जाने के लिए बातचीत जारी है।