राजौंद। नगर पालिका राजौंद में 78.02 प्रतिशत मतदान हुआ। सियासी जानकारों के मुताबिक चुनाव में मुकाबला भाजपा की प्रत्याशी बबिता, पूर्व विधायक के समर्थित आजाद उम्मीदवार हरिपाल फौजी व निर्दलीय कर्ण सिंह के बीच है। वहीं इस चुनाव में राज्य मंत्री कमेलश ढांडा और पूर्व विधायक सतविंद्र राणा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
निकाय चुनाव की घोषणा होते ही भाजपा ने जजपा के बगैर चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। इस स्थिति में पूर्व विधायक सतविंद्र राणा ने हरिपाल फौजी को जजपा पार्टी की तरफ से प्रत्याशी घोषित करवा दिया। बाद में जजपा व भाजपा का निकाय चुनाव एक साथ लड़ने का समझौता हो गया। ऐसे में भाजपा ने बबीता को टिकट दिया। इसके बाद सतविंद्र राणा ने सियासी समझौते की अनदेखी करते हुए हरपाल फौजी का चेयरमैन का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के तौर लड़वा दिया और खूब मेहनत कर फौजी के लिए वोट मांगे। मतदान का दिन आने तक आजाद प्रत्याशी कर्ण सिंह मुकाबले में दिखाई दिया।
राजौंद की सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित थी। इस पर भाजपा ने पिछड़ा वर्ग के नरेंद्र प्रजापति की अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाली उनकी पत्नी पर दांव खेल दिया। चुनावी दंगल में चल रहे उतार चढ़ाव के बीच मौजूदा राज्य मंत्री कमेलश ढांडा व पूर्व विधायक की साख दांव पर लगी हुई है। साख बचाने में कौन सफल हो पाएगा। इसका फैसला जनता ने वोट डाल कर कर दिया। चुनाव परिणाम 22 जून को आएगा।
उल्लेखनीय है कि कमलेश ढांडा ने 2019 में कलायत विधानसभा से जीत हासिल की और मनोहर लाल की सरकार में राज्यमंत्री बन गईं। कलायत विधानसभा में कस्बा राजौंद है। राजौंद के नजदीक ही मंत्री का गांव खेड़ी सिंबल वाली है। उनके पति स्वर्गीय नर सिंह ढांडा भी हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे।
जजपा नेता सतविंद्र राणा राजौंद से दो बार विधायक रह चुके है। दोनों बार सतविंद्र राणा ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसके बाद राजौंद विधानसभा की जगह कलायत विधानसभा बना दिया गया। उन्होंने कालका से एक बार कांग्रेस की टिकट पर और दूसरी बार बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर कालका से चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2019 में जजपा के टिकट पर कलायत से चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर पर रहे। संवाद