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कृषि विभाग का दावा फिर फेल, नहीं पहुंची डीएपी

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कृषि विभाग का 2 नंवबर को जींद से 8000 डीएपी खाद पहुंचने का दावा महज दाव बनकर रह गया। सायं सात बजे तक भी यह खाद यहां नहीं पहुंचा था। अब बुधवार को ही खाद के पहुंचने की संभावनाएं हैं।
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ऊपरी स्तर पर हो रही देरी का खामियाजा इस बार किसानों को गेहूं की बिजाई में देरी से उत्पादन को लेकर भुगतना पड़ सकता है। किसानों का सवाल है कि आखिर कब तक खाद का इंतजार करें। वहीं मार्केट में एनपीके खाद डीएपी खाद से 270 रुपये महंगा है। जिस कारण किसान इस खाद को खरीदने से बच रहे हैं और इसी उम्मीद में हैं कि आज खाद आ जाए, कल आ जाए। लेकिन स्वयं कृषि विभाग भी इस स्थिति में नजर नहीं आ रहा है कि खाद आखिर कब आएगी।
विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में फिर दावा किया गया कि खाद की नियमित आपूर्ति का प्रयास किया जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि जिला में दो नवंबर से डीएपी खाद की आपूर्ति लगातार जारी है। किसानों की सुविधाओं को देखते हुए 3 नवंबर को करनाल रेक प्वाइंट से आईपीएल डीएपी के 8 हजार बैग तथा 4 नवंबर को करनाल रैक प्वाइंट से इफ्को, डीएपी के 8 हजार बैग जिला कैथल को प्राप्त होंगे। इसी प्रकार 5 नवंबर को 8 हजार बैग पीपीएल डीएपी खाद, 6 और 7 नवंबर की रात को 60 हजार बैग इफ्को डीएपी खाद का पूरा रेक जिला कैथल में आएगा। इसके अतिरिक्त जिला में एनपीके व एसएसपी खाद भी भिन्न मंडियों में उपलब्ध रहेगा।
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उन्होंने बताया कि इफ्को बिक्री केंद्र कैथल में डीएपी खाद की बिक्री प्रतिदिन जारी रहेगी और जिला में किसानों की मांग अनुसार डीएपी खाद की उपलब्धता भी रहेगी। उप निदेशक कर्मचंद ने किसानों से अनुरोध किया कि वे अपने गांवों में स्थित सहकारी समितियों से खाद लें। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी किसान का सहकारी समिति में लेन-देन नहीं है, तो वह मेरी फसल मेरा ब्यौरा के पंजीकरण की रसीद दिखाकर इफ्को बिक्री केंद्र से खाद ले सकता है। किसान अपनी आवश्यकता अनुसार ही डीएपी खाद का प्रयोग करें तथा डीएपी के वैकल्पिक खादों के प्रयोग की भी सलाह दी जाती है।
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