6 अगस्त की रात को प्रदेश के लाखों युवा जहां पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी में रात भर पढ़ने में व्यस्त थे। वहीं, प्रश्नपत्र लीक करने वाले गिरोह के सदस्य सुबह साढ़े चार बजे तक सौदे तय करते हुए आंसर-की बांटते रहे। 6 अगस्त को कैथल में इस गिरोह ने पुलिस से बचने के लिए खूब भागदौड़ की। कैथल शहर में ही तीन ठिकाने बदलकर देर सायं तक आंसर-की उपलब्ध करवाई, लेकिन फिर भी वे बच नहीं पाए।
पुलिस के अनुसार सबसे पहले गिरोह में शामिल नरेंद्र उन दो युवकों को अपनी गाड़ी में बैठाकर कैथल पहुंचता है, जिसने उसने पहले की परीक्षा के लिए एडवांस में पैसे लिए हुए थे। उसके साथ योजना में शामिल कैथल के करनाल रोड पर स्थित बालाजी अकादमी संचालक रमेश कई उम्मीदवारों को अपनी अकादमी में बुला लेता है। यहां उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ही उम्मीदवार एकत्रित होंगे, लेकिन यहां 6 अगस्त को दिन में करीब 35 से 40 उम्मीदवार एकत्रित हो गए। जिनके सामने नरेंद्र ने आंसर-की देने की हिम्मत नहीं जुटाई और उन्होंने अपनी योजना बदलते हुए पाई गांव में एक सुनसान इलाके में स्थित मुर्गी फार्म पर एकत्रित होने की योजना बनाई। इसके बाद उक्त सभी 30 से 40 युवक, नरेंद्र और राजकुमार उक्त मुर्गी फार्म पर पहुंचे। जहां किसी अन्य काम से वहां से गुजर रही पुलिस की गाड़ी को देखकर सभी लोग तितर-बितर हो गए। इसके बाद सायं तक राजकुमार और नरेंद्र के पास सौदे तय कर चुके युवाओं के फोन आने शुरू हो गए।
इसके बाद नरेंद्र अपने उन दो साथी युवकों, जिनसे वह पहले एडवांस में पैसे ले चुका था। दोनों को लेकर करनाल रोड पर स्थित एक होटल में पहुंचा। जहां दोनों को आंसर-की उपलब्ध करवाकर वहां से चला गया। इसके बाद आरोपी रमेश को बता दिया कि इन युवकों से वह आंसर-की ले ले। इन युवकों के पास रमेश ने पहुंच कर अपने हाथ से आंसर-की नोट की और उसे फोन पर उन युवकों को भेज दिया, जिनके साथ सौदे तय हो गए थे। इतना ही नहीं आरोपी रमेश ने वॉयस मैसेज बनाकर व्हाट्सएप पर भेजा हुआ था, जिसमें उसने विश्वास दिलवाया था कि वह आंसर-की उपलब्ध करवा देगा।
इसके बाद वे 6 व 7 अगस्त की रात भर व सुबह साढ़े चार-पांच बजे तक सौदे तय करते हुए आंसर-की उपलब्ध करवाते रहे। किसी को बॉय हैंड तो किसी को मोबाइल पर यह आंसर-की बेचते रहे। पुलिस के अनुसार इन लोगों की योजना अधिक से अधिक लोगों को आंसर-की बेचने की थी। जो सफल नहीं हो पाई।