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कौशल रोजगार निगम को भंग करने की मांग को लेकर कर्मचारी उतरे सड़कों पर

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जींद। कौशल रोजगार निगम को भंग करने की मांग को लेकर शुक्रवार को जिलेभर के कर्मचारियों ने ग्रीन बेल्ट में धरना दिया। इसके बाद प्रदर्शन करते हुए लघुसचिवालय पहुंचकर डीसी डॉ. मनोज कुमार को ज्ञापन सौंपा। इसमें रोजगार निगम को भंग करने तथा कोरोना काल में कार्यरत कर्मचारियों को फिर से नौकरी पर रखने की मांग की गई।
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प्रदर्शन में सर्वकर्मचारी संघ के बैनर तले सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालय, नगर परिषद, पालिका के कर्मचारियों ने भाग लिया। संघ के जिला प्रधान रामफल दलाल ने कहा कि कौशल रोजगार निगम भंग कर अनियमित कर्मियों को नियमित करने, पक्का होने तक समान काम समान वेतन और सेवा सुरक्षा प्रदान करने, पुरानी पेंशन बहाल करने, पीटीआई, ड्राइंग टीचर, स्वास्थ्य ठेका कर्मचारियों समेत छंटनीग्रस्त कर्मियों की बहाली, नेशनल मुद्रीकरण पाइपलाइन, बिजली संशोधन बिल को वापस लेने की मांग की गई। ऑल हरियाणा पावर वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी ने कहा कि एनईपी को रद्द करने, लिपिक का वेतन 35हजार 400 करने, खाली पड़े लाखों पदों पर भर्ती आदि कई मांगे बताईं।
अध्यापक संघ के जिला प्रधान साधूराम ने कहा कि कौशल रोजगार निगम से कच्चे कर्मचारियों के पक्का होने के रास्ते बंद हो जाएंगे। इस कारण कभी भी नियमित भर्ती नहीं हो पाएगा। यदि सरकार ने उनकी मांगों की तरफ ध्यान नहीं दिया तो पूरे प्रदेश का कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। इस मौके पर भूप सिंह वर्मा, संजीव सिंगला, वेदपाल रिढाल, राजपाल दूहन, संजीव ढांडा, ईश्वर सच्चाखेड़ा, जगदीश शर्मा, ईश्वर ठाकुर, छाजूराम नैन, अनीता हेमसा, संदीप पिल्लूखेड़ा, वेदपाल ढिल्लो, राजेंद्र सिंह, धर्मवीर भंभेवा, अनिल कुमार, राजेश एमपीएचडब्ल्यू, दलेल राणा, नरेश ढांडा भी मौजूद रहे।
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रोजगार निगम कर्मचारियों के साथ धोखा : संदीप
जींद। हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन इंटक के राज्य प्रधान वीरेंद्र सिंगरोहा, राज्य महासचिव दिनेश हुड्डा व राज्य उप महासचिव संदीप रंगा ने कहा कि सरकार द्वारा कौशल रोजगार निगम लेकर आना सभी कर्मचारियों के साथ धोखा है। शुरुआत में कौशल रोजगार निगम का गठन केवल ठेका प्रथा को खत्म करने के लिए किया गया था। परंतु सरकार द्वारा धीरे-धीरे सभी विभागों में जो कर्मचारी नियमित नही हैं, उनको कौशल रोजगार निगम में ले रही है। ये कर्मी कभी नियमित नहीं हो सकेंगे।
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