अनीता रानी, प्रधान नगर पालिका सफीदों।
- फोटो : Jind
जींद। नगर निकाय चुनाव जींद, नरवाना, उचाना व सफीदों में चेयरमैन बनी तीन महिलाओं में से दो गृहिणी हैं जबकि एक बीएएमएस है। वहीं उचाना नगर पालिका प्रधान बने विकास श्योकंद उर्फ काला समाजसेवी की भूमिका में अधिक रहे हैं। इनमें से केवल जींद नगर परिषद प्रधान डॉ. अनुराधा सैनी की पृष्ठभूमि भाजपा की रही है जबकि अन्य की किसी पार्टी से कोई ज्यादा संबंध नहीं रहे हैं।
नगर परिषद जींद की प्रधान बनी डॉ. अनुराधा सैनी बीएएमएस हैं। डॉ. अनुराधा सैनी अपने ससुर के क्लीनिक राज अस्पताल में प्रैक्टिस करती हैं। इनके ससुर डॉ. राज सैनी भी बीएएमएस हैं। वह शुरू से ही भाजपा में रहे हैं। फिलहाल वह जिला भाजपा के महामंत्री पद पर कार्यरत हैं। डॉ. अनुराधा सैनी भी भाजपा महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष हैं।
उचाना नगर परिषद प्रधान विकास श्योकंद उर्फ काला पेशे से किसान हैं। उनका किसी भी पार्टी से कोई संबंध नहीं रहा है। विकास काला ने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। इसके बाद उन्होंने कोई नौकरी नहीं की और अपनी पुस्तैनी जमीन पर खेती करनी शुरू कर दी। इसके अलावा वह समाजसेवी के कार्य भी करने लगे। उचाना में समाजसेवी क्षेत्र में उनका काफी नाम रहा है। इसी बलबूते पर उन्होंने यह जीत हासिल की है। विकास काला ने कहा कि उन्होंने अभी तक पार्टियों को वोट दिए हैं जबकि उनके पास किसी भी पार्टी का कोई भी पद नहीं रहा और वह न ही किसी पार्टी में सक्रिय रहे हैं।
नरवाना नगर परिषद की प्रधान बनी मुकेश रानी गृहिणी हैं। उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं रहा। उनके ससुर लक्षमण मिर्धा इनेलो में रहे हैं। फिलहाल वह किसी पार्टी में नहीं हैं। मुकेश रानी ने नगर परिषद नरवाना का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा है। लक्ष्मण मिर्धा समाजसेवा में काफी सक्रिय रहे हैं। इसी समाजसेवी के कारण नरवाना के लोगों ने मुकेश रानी को वोट दिए।
इसी प्रकार सफीदों से नगर परिषद प्रधान बनी अनीता रानी भी एक गृहिणी हैं। उनका भी राजनीति से दूर-दूर का संबंध नहीं रहा। उनके पति संजय अधलखा उर्फ बिट्टा की गारमेंट की दुकान है। संजय अधलखा उर्फ बिट्टा का नाम एक समाजसेवी के रूप में जाना जाता है। इसी समाजसेवी का फल उन्हें सफीदों के लोगों ने दिया है।
विकास श्योकंद उर्फ काला, प्रधान नगर पालिका उचाना।- फोटो : Jind