जींद। राष्ट्रपति अवॉर्डी सुनीता मलिक ने शिक्षा के क्षेत्र में तो बेहतर नाम कमाया है। उन्होंने 40 बार रक्तदान कर अपनी पहचान बनाई है। जब वह कॉलेज में पढ़ती थी तो उसी समय से उन्होंने रक्तदान शुरू कर दिया था।
सुनीता मलिक का मानना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। उन्होंने 15 बार तो इमरजेंसी के मरीजों के लिए फोन पर सूचना मिलने पर ही रक्दान किया। इसके अलावा जब भी शिविर लगने की सूचना उनको मिलती तो वह इससे पीछे नहीं हटीं। उन्होंने बताया कि रक्तदान करने से उनके शरीर को तो लाभ मिलता ही है बल्कि दूसरों को इससे जिंदगी मिलती है। संवाद