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बीमार बच्चे का इलाज करने की बयाज चिकित्सक ने मांगे जन्म प्रमाणपत्र

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निजी अस्पताल में अपने परिजनों के साथ बच्चे का पिता छाज्जूराम। - फोटो : Jind
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दो दिन पहले नागरिक अस्पताल में अपने बच्चे का इलाज करवाने पहुंचे उचाना मंडी के छाज्जूराम को इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक ने थप्पड़ ही नहीं मारा था, बल्कि नर्सरी (एसएनसीयू) में मौजूद स्टाफ ने भी दुर्व्यवहार किया था। छाज्जूराम अपनी पत्नी के साथ जब बच्चे को नर्सरी में दाखिल करने की गुहार लगा रह रहा था तो नर्सरी स्टाफ ने रात में ही बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र मांगते हुए कहा कि बच्चा एक महीने से ऊपर का है, इसलिए इसे हम दाखिल नहीं कर सकते। बच्चे को कहीं और लेकर जाओ। मेडिकल स्लिप पर नर्सरी स्टाफ ने अपने आप इलाज करवाने की बात लिखी और किसी भी बात के लिए बच्चे के पिता को जिम्मेदार ठहराते हुए उससे हस्ताक्षर करवा लिए। मजबूरी में पिता ने हस्ताक्षर कर दिए तो नर्सरी स्टाफ ने बच्चे को दाखिल कर लिया। दो घंटे बाद सुबह छह बजे पिता अपने बच्चे को एक निजी अस्पताल ले गया। फिलहाल, बच्चे का इलाज चल रहा है। यह जानकारी अमर उजाला से बातचीत में बच्चे के पिता ने सांझा की।
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अमर उजाला संवाददाता ने रविवार सुबह बच्चे का पता लगाया गया तो वह शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल मिला। छाज्जूराम ने बताया कि वह उचाना स्थित आईटीआई में एक्सटेंशन अनुदेशक के पद पर कार्यरत है। 10 जनवरी रात को तीन बजे उसके एक माह के बच्चे विहान की तबीयत खराब हो गई। वह रात साढ़े तीन बजे बच्चे को लेकर नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचा। चिकित्सक ने बच्चे को देखते ही रोहतक पीजीआई रेफर करने की बात कही। छाज्जूराम ने कहा कि वह रात को बच्चे को लेकर कहां जाएगा, जबकि इसकी हालत नाजुक है। वह रोहतक नहीं पहुंच पाएगा। छाज्जूराम तथा उसकी पत्नी सुमन चिकित्सक के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया और पीजीआई रोहतक ले जाने के लिए कहा। इसके बाद छाज्जूराम ने मोबाइल का कैमरा आनकर बात को दोहराने के लिए कहा तो इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने उसे थप्पड़ मारा और मोबाइल छीनकर अस्पताल से जाने के लिए कहा। इसके बाद वह बच्चे को लेकर नर्सरी में गया तो स्टाफ ने कहा कि बच्चा एक महीने से ज्यादा का है, इस कारण उसे दाखिल नहीं कर सकते। हंगामा होने लगा तो नर्सरी स्टाफ ने मेडिकल स्लिप पर खुद अपने हाथों से लिखा कि मैं अपने बच्चे का बिना चिकित्सक की अनुमति के जबरदस्ती इलाज करवाना चाहता हूं। इसके बाद नर्सरी स्टाफ ने छाज्जूराम के हस्ताक्षर करवाकर बच्चे को दाखिल कर लिया। सुबह चार बजे बच्चे को दाखिल किया गया। छह बजे के आसपास जब स्टाफ ने बच्चे की कोई देखभाल नहीं की तो छाज्जूराम उसे निजी अस्पताल ले गया। छाज्जूराम ने कहा कि स्टाफ की असंवेदनशीलता और हठधर्मिता के कारण वह अपने बच्चे को एक निजी अस्पताल में ले गया। सोमवार को वह अस्पताल पहुंचकर सिविल सर्जन को मामले की शिकायत करेगा।
जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित
मामले की जांच के लिए नागरिक अस्पताल प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें एमएस डॉ. गोपाल गोयल, डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला तथा डिप्टी एमएस राकेश शर्मा को शामिल किया गया है। सोमवार से कमेटी जांच शुरू करेगी।
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स्वास्थ्य महानिदेशक ने दिए जांच के आदेश
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। सिविल सर्जन को मामले की जांच के लिए कहा गया है। जांच रिपोर्ट में यदि चिकित्सक की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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डॉ. सूरजभान कांबोज, स्वास्थ्य महानिदेशक

जींद सिविल अस्पताल में नर्सरी स्टाफ द्वारा जबरदस्ती लिखवाकर पिता के हस्ताक्षर करवाई गई स्लिप।- फोटो : Jind

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