एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी। यह कहावत नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सकों पर सटीक बैठ रही है। रविवार रात को इमरजेंसी में तैनात दो चिकित्सकों ने दो घंटे तक न तो मरीज का इलाज किया और न ही उसकी एमएलआर (मेडिकल लीगल रिपोर्ट) काटी। इसके अलावा चिकित्सकों ने लड़ाई-झगड़े में घायल होकर आए तीन लोगों की सूचना भी पुलिस को देना उचित नहीं समझा। चिकित्सक यही नहीं रुके। उन्होंने मरीज के परिजनों पर दुर्व्यवहार करने, राजनीतिक दबाव डलवाने के आरोप लगाए। इसके अलावा मीडिया पर इन चिकित्सकों ने निशाना साधा। वहीं मरीज का इलाज नहीं होने पर मौके पर पहुंचे डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला पर भी इन चिकित्सकों ने दुर्व्यवहार करने तथा कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया।
सोमवार को डॉ. राजेश भोला ने भी इन चिकित्सकों के खिलाफ दुर्व्यवहार करने, अधिकारियों के आदेश नहीं मानने तथा मरीज को परेशान करने की शिकायत सिविल सर्जन को दी। डॉ. भोला ने यह भी कहा कि चिकित्सक इमरजेंसी वार्ड को छोड़कर चले गए। उन्होंने खुद एक घंटे तक इमरजेंसी को संभाला। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दी है। मरीज के परिजनों ने भी इमरजेंसी वार्ड में तैनात दोनों चिकित्सकों के खिलाफ डीसी, सिविल सर्जन व एसपी को शिकायत दी है।
रविवार शाम को लगभग छह बजे गांव रामकली निवासी मनजीत, जोगेंद्र व दीपक गांव निर्जन में हुए झगड़े में घायल हो गए थे। तीनों को लेकर परिजन नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तो चिकित्सकों ने उनकी एमएलआर काटने से मना कर दिया। इसके बाद परिजनों ने एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल फोन किया तो उन्होंने इमरजेंसी के चिकित्सक को फोन करके एमएलआर काटने के लिए कहा। इसके बावजूद यहां तैनात चिकित्सकों ने एमएलआर नहीं काटी। परिजनों ने फिर डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला के पास फोन किया तो उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों से बात करवाने के लिए कहा। लेकिन चिकित्सक ने बात करने से मना कर दिया। इसके बाद खुद डॉ. राजेश भोला इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे और एमएलआर काटने का आदेश दिया। आदेश मानना तो दूर चिकित्सकों ने उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए खुद ही काम कर लेने के लिए कहा। इतना कहकर दोनों चिकित्सक इमरजेंसी छोड़कर चले गए। बाद में सूचना पाकर सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह, एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल मौके पर पहुंचे। लगभग एक घंटे तक डॉ. राजेश भोला ने खुद इमरजेंसी वार्ड को संभाला।
इमरजेंसी ड्यूटी चिकित्सकों ने जारी किया मृत्यु प्रमाणपत्र
सुबह आठ बजे नागरिक अस्पताल के गेट पर इमरजेंसी में ड्यूट दे रहे छह चिकित्सकों ने धरना शुरू कर दिया। उन्होंने एक अजीब सा मृत्यु प्रमाणपत्र बनाया। जिस पर मरीज के स्थान पर मृतक का नाम इमरजेंसी डॉक्टर लिखा हुआ था। मृत्यु का कारण स्थानीय मीडिया व राजनीतिक दबाव लिखा था। इंफेक्शन का कारण डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला लिखा था। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह मौके पर पहुंचे और चिकित्सकों को अंदर आकर बात करने के लिए कहा।
इमरजेंसी चिकित्सकों की शिकायत
सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह को दी शिकायत में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात सभी छह चिकित्सकों ने कहा कि डॉ. राजेश भोला उन पर अनावश्यक रूप से दबाव बना रहे हैं। डॉ. भोला उन पर सबसे बीच में चिल्लाए तथा कार्य में बाधा डाली। इसके अलावा डॉ. भोला ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इससे पहले भी डॉ. भोला उनके साथ ऐसा व्यवहार कर चुके हैं।
डॉ. भोला ने दी शिकायत
डॉ. राजेश भोला ने दी अपनी शिकायत में कहा कि उनके फोन करने के बावजूद मरीजों का उपचार नहीं किया गया और न ही एमएलआर काटी गई। जब वह खुद अस्पताल पहुंचे और एमएलआर काटने के लिए कहा तो ड्यूटी पर तैनात दोनों चिकित्सकों ने मना कर दिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि दोनों चिकित्सकों ने आदेशों का पालन नहीं किया। इसके बाद दोनों चिकित्सक इमरजेंसी ड्यूटी को छोड़कर निकल गए, जोकि एक गंभीर मामला है।
मरीज के परिजनों ने दी शिकायत
रात को इमरजेंसी में इलाज नहीं होने पर शिकायत देते रामकली निवासी अनिल ने कहा कि उनके भाई मनजीत, चाचा जोगेंद्र व दीपक को घायल अवस्था में लेकर वह नागरिक अस्पताल में पहुंचे थे। यहां दो घंटे तक चिकित्सकों ने न तो घायलों का उपचार किया और न ही एमएलआर काटी। इसके अलावा पुलिस के पास रूका (झगड़े की सूचना) भी नहीं भेजा। चिकित्सकों ने उनके मरीजों व खुद उनके साथ दुव्र्यवहार करते हुए गाली-गलौज की और धमकी दी। जब उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को फोन किया तो भी उनके मरीजों का उपचार नहीं किया।
मीडिया कर्मियों पर भड़के चिकित्सक
जब रात को इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ड्यूटी छोड़कर निकल रहे थे तो कुछ मीडिया कर्मियों ने उनका वीडियो बना लिया। इस पर इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक भड़क गए और धरने के दौरान मीडिया कर्मियों पर निशाना साधा। चिकित्सकों की बैठक में भी मीडिया कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही गई।
दिनभर चली चिकित्सकों की बैठक
सोमवार दिनभर चिकित्सकों की बैठक चलती रही। इसमें चिकित्सकों के दोनों पक्षों के बीच सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह व एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने समझौता करवाने का दबाव बनाया, लेकिन दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी गलती मानने से इनकार करते रहे। बाद में दोनों पक्षों ने अपनी शिकायत सिविल सर्जन को दे दी।
एक वर्ष भी नहीं हुआ, शिकायतों की लाइन
नागरिक अस्पताल में एक वर्ष के दौरान छह नए चिकित्सक आए हैं। इन सभी की ड्यूटी इमरजेंसी वार्ड में लगाई गई है। अब तक मरीजों ने इन चिकित्सकों के खिलाफ ढेरों शिकायतें कर दी हैं। इनमें से कुछ शिकायतें को अस्पताल प्रशासन ने निपटवा दी और कुछ की जांच चल रही है। इनमें से एक शिकायत की जांच डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रघुबीर पूनिया कर रहे हैं। जबकि एक शिकायत की जांच डॉ. रमेश पांचाल। सभी शिकायतें एमएलआर काटने को लेकर व पोस्टमार्टम करने से मना करने की हैं।
जिले में कहीं भी कटवाई जा सकती है एमएलआर
यदि किसी व्यक्ति का किसी के साथ झगड़ा हो जाता है और वह अस्पताल में उपचार करवाते समय एमएलआर कटवाना चाहे तो कटवा सकता है। जिले का कोई भी व्यक्ति जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में एमएलआर कटवा सकता है। इसके लिए कोई भी चिकित्सक मना नहीं कर सकता है।
दोनों पक्षों के बीच बातचीत करवाई गई है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। इसके अलावा दोनों पक्षों ने तथा मरीज के परिजनों ने शिकायत दी है। शिकायतों की जांच करवाई जाएगी। नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांच में जो भी पक्ष दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।