जुलाना। क्षेत्र का ऐतिहासिक गांव मालवी शिक्षा के क्षेत्र में दशकों से अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। आज भले ही गांव-गांव में स्कूल और कॉलेज खुल चुके हों लेकिन एक समय ऐसा भी था जब आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा के संसाधन बेहद सीमित थे। उस दौर में वर्ष 1954 में स्थापित हुआ मालवी का राजकीय उच्च विद्यालय पूरे क्षेत्र के लिए शिक्षा का बड़ा केंद्र बनकर उभरा था।
ग्रामीण बताते हैं कि उस समय क्षेत्र में गिने-चुने ही उच्च विद्यालय थे। ऐसे में मालवी गांव में उच्च विद्यालय की स्थापना होना बड़ी उपलब्धि मानी गई थी। यही कारण था कि करेला, झमोला, राजगढ़, देवरड़, कमाच खेड़ा, फरमाना, देशखेड़ा समेत आसपास के करीब 15 गांवों के विद्यार्थी यहां पढ़ने के लिए आते थे।
कई छात्र रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते थे। ग्रामीणों के अनुसार उस दौर में शिक्षा हासिल करना आसान नहीं था। न पर्याप्त साधन थे और न ही परिवहन की सुविधा। इसके बावजूद विद्यार्थियों में पढ़ने का उत्साह और परिवारों में शिक्षा के प्रति जागरूकता देखने को मिलती थी।
स्कूल में संसाधन सीमित थे लेकिन शिक्षक पूरी लगन और अनुशासन के साथ विद्यार्थियों को पढ़ाते थे। यही वजह रही कि इस विद्यालय ने क्षेत्र में शिक्षा की मजबूत नींव रखी।
ग्रामीणों का मानना है कि इस विद्यालय ने केवल मालवी गांव ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की पीढ़ियों को शिक्षित करने का कार्य किया। आज भी यहां से पढ़कर निकले अनेक लोग सरकारी विभागों, सेना, शिक्षा और निजी संस्थानों में सेवाएं देकर गांव और क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं।
वर्जन
पहले के समय में लोग खेती-किसानी तक सीमित रहते थे और पढ़ाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। मालवी स्कूल खुलने के बाद धीरे-धीरे लोगों की सोच बदली और शिक्षा का माहौल बना। उन्होंने कहा कि कई छात्र सुबह अंधेरे में घर से निकलते थे और पैदल स्कूल पहुंचते थे, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका उत्साह कम नहीं होता था।
-ध्रुव ग्रामीण
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मालवी स्कूल उस समय पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की किरण था। यहां पढ़ने वाले कई छात्र बाद में शिक्षक, सैनिक, अधिकारी और बड़े पदों पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन और संस्कार भी विकसित करता था।
-योगेश ग्रामीण
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पहले लड़कियों की शिक्षा को लेकर जागरूकता कम थी, लेकिन इस स्कूल के कारण धीरे-धीरे बेटियों को भी पढ़ाने का माहौल बना। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों ने शिक्षा को सम्मान देना इसी विद्यालय से सीखा।
-डॉ. संदीप जांगड़ा।
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आज भी गांव के लोग इस स्कूल के इतिहास पर गर्व करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में भले ही शिक्षा के अनेक साधन उपलब्ध हों, लेकिन उस समय मालवी स्कूल ने जो भूमिका निभाई, वह क्षेत्र के इतिहास का अहम अध्याय है।
-सतीश जांगड़ा
28जेएनडी29: मालवी गांव स्थित ऐतिहासिक राजकीय उच्च विद्यालय का भवन। संवाद
28जेएनडी32: ध्रुव।
28जेएनडी33: योगेश।
28जेएनडी34: डॉ. संदीप जांगड़ा।
28जेएनडी29: मालवी गांव स्थित ऐतिहासिक राजकीय उच्च विद्यालय का भवन। संवाद- फोटो : 1
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28जेएनडी29: मालवी गांव स्थित ऐतिहासिक राजकीय उच्च विद्यालय का भवन। संवाद- फोटो : 1
28जेएनडी29: मालवी गांव स्थित ऐतिहासिक राजकीय उच्च विद्यालय का भवन। संवाद- फोटो : 1