07जेएनडी19-उचाना कलां के प्राचीन पातालेश्वर शिव मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु। संवाद
उचाना। रक्षाबंधन से सावन की समाप्ति होने जा रही है। इस दिन सावन की पूर्णिमा तिथि है। सावन का महीना हिंदू धर्म में भगवान शिव की भक्ति और तप के लिए विशेष महत्व रखता है। यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और शिव कृपा प्राप्त करने का सबसे अच्छा अवसर होता है। शास्त्रों के अनुसार अगर आप पूरे सावन भर किसी कारण से पूजन नहीं कर पाए हैं तो सावन के अंतिम दिन कुछ उपाय करने से पूरे महीने की पूजा के समान फल मिलेगा।
उचाना कलां के प्राचीन पातालेश्वर शिव मंदिर पुजारी राजू शर्मा ने कहा कि शिव पुराण के अनुसार बेलपत्र और धतूरा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। तीन से अधिक पत्ती वाला बेलपत्र बेहद ही शुभ माना गया है। चार या पांच पत्ती वाले बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। सावन के अंतिम दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और शिव मंदिर जाएं। वहां शिवलिंग पर गंगाजलए दूध और शहद के मिश्रण पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद तीन से अधिक पत्ती वाला बेलपत्र उनको अर्पित कर दें और नमरू शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।