पुरानी अनाज मंडी में हैफेड की सरकारी दुकान से यूरिया लोड करते किसान। संवाद
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जींद। सरसों की बिजाई का काम शुरू हो चुका है और गेहूं की बिजाई सिर पर है। ऐसे में किसानों को डीएपी खाद की जरूरत है, लेकिन जिले में इसका स्टॉक नहीं है। हैफेड से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जींद में डीएपी के तीन रैक लगने थे, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के कारण इन्हें भिवानी, सिरसा व हांसी भेज दिया गया। ऐसे में जींद के किसानों को डीएपी नहीं मिल रहा है।
दरअसल 10 अक्तूबर से सरसों की बिजाई शुरू हो जाती है। इस बार सुंडी से फसल खराब होने के चलते कपास के खेत जल्दी खाली हो गए हैं। ऐसे में सरसों की बिजाई कुछ जल्दी हो रही है। इसके चलते जिले में डीएपी की मांग बढ़ गई है। जिले में करीब साढ़े पांच लाख एकड़ में गेहूं की बिजाई होती है। सरसों की बिजाई पिछले साल करीब छह हजार एकड़ में हुई थी। लेकिन इस बार कृषि विभाग का अनुमान है कि यह 12 हजार एकड़ तक हो सकती है। ऐसे में जिले में रबी की फसल में करीब छह लाख बैग डीएपी की जरूरत होती है। फिलहाल जिले में सरकारी एजेंसी के पास डीएपी का स्टॉक नहीं है। हालांकि कुछ निजी दुकानदारों के पास डीएपी उपलब्ध है।
सरकार बरत रही भेदभाव
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश गोयत ने बताया कि सरकार जींद के साथ भेदभाव बरत रही है। जींद में आने वाला डीएपी दूसरे जिलों में भेजा गया है। यह राजनीतिक प्रभाव के कारण हुआ है। जींद के किसानों को डीएपी नहीं मिल रहा है। इसके लिए जिले के जनप्रतिनिधियों को आवाज उठानी चाहिए। सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं है और निजी दुकानों पर है। इससे साफ है कि सरकार कालाबाजारी करवा रही है।
अभी नहीं आई है मांग
उपनिदेशक, कृषि विभाग, जींद डॉ. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि जींद जिले में अभी डीएपी की मांग नहीं है। यहां धान के बाद लोग गेहूं की बिजाई करेंगे। जब तक डीएपी का स्टॉक आ जाएगा। अभी जिले में कुछ स्टॉक है, सरसों के किसानों के लिए यह पर्याप्त है। यदि कोई दुकानदार खाद के साथ अन्य वस्तुएं जबरन बेच रहा है तो उसकी शिकायत किसान दें, कार्रवाई की जाएगी।