गांव में घटनाक्रम की जानकारी देते अनुसूचित जाति के लोग। संवाद
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जींद। छात्तर गांव में अनुसूचित जाति के लोगों के सामाजिक बहिष्कार के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि प्रशासन सब कुछ ठीकठाक दिखाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। गांव के अनुसूचित जाति के लोगों का कहना है कि उन्हें गांव में दूध व राशन तक नहीं मिल रहा है। इसके लिए भी पास के दूसरे गांवों में जाना पड़ रहा है। हालांकि घटना को एक महीना बीत चुका है, लेकिन पहली बार राशन व जरूरी सामान की स्थिति जानने के लिए जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय की टीम छात्तर गांव पहुंची।
छात्तर गांव में विवाद यूं तो एक अगस्त से चल रहा है, लेकिन यह मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासन यहां फिर से सक्रिय हुआ है। छात्तर गांव उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के विधानसभा क्षेत्र में आता है। अनुसूचित जाति के लोगों का कहना है कि 26 सितंबर को करीब 150 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया गया। इसके लिए गांव में पंचायत हुई। इसके बाद भी प्रशासन मामले को दबाने में लगा रहा। गांव में अनुसूचित जाति के चार मोहल्ले हैं। इनमें से एक मोहल्ले के लोगों का कहना है कि उनका बहिष्कार किया गया है। इसके चलते उन्हें गांव में कोई भी सामान नहीं मिल रहा है। यहां तक की छोटी से छोटी चीज खरीदने के लिए पास के गांवों में जाना पड़ता है।
गांव में बढ़ी हलचल, माहौल में बेचैनी
मामला मीडिया में आने के बाद वीरवार को कई संगठनों के लोग गांव में पहुंचे। इससे बाहरी लोगों से गांव में हलचल बढ़ी हुई है, लेकिन ग्रामीणों में बेचैनी साफ महसूस की जा सकती है। वीरवार को बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधिमंडल गांव में पहुंचा और स्थिति जानी। इसके अलावा अन्य कई संगठन व एनजीओ की टीम भी गांव पहुंची।
16 अक्तूबर से जिला मुख्यालय पर आंदोलन
इस मामले में भीम आर्मी ने 16 अक्तूबर से जिला मुख्यालय पर आंदोलन का एलान किया है। आर्मी के जिला प्रधान संदीप बराह कलां ने बताया कि प्रशासन मामले में ढील बरत रहा है। ऐसे में अब जिला स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
जींद के एसपी वसीम अकरम ने कहा कि गांव में सौहार्द बनाने के लिए प्रशासन लगातार काम कर रहा है। 23 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। प्रशासन गांव पर लगातार नजर रख रहा है। किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है।