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ओमिक्रॉन का खतरा : दो दिन सरकारी दफ्तरों में खूब बरती सख्ती, अब सब चल रहा पहले की तरह

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बिना मास्क लगाए एक-दूसरे से सटकर खड़े नागरिक अस्पताल में लोग। - फोटो : Jind
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जिला प्रशासन द्वारा केवल दो दिन ही सख्ती की गई। अब सब कुछ पहले जैसा ही हो गया है। वीरवार व शुक्रवार को एसपी ऑफिस तथा लघु सचिवालय में आने वाले लोगों के वैक्सीनेशन प्रमाण-पत्र देखे गए। नागरिक अस्पताल में भी यह व्यवस्था लागू की गई लेकिन अब कर्मचारी यहां आने वाले लोगों से कोई पूछताछ नहीं करते। इसके अलावा मास्क की तरफ भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा बरकरार है लेकिन प्रशासन ने फिर से ढील बरत दी है। सबसे बुरा हाल नागरिक अस्पताल का है। यहां आने वाले मरीज एक-दूसरे से सटकर खड़े होते हैं। इनको दूर करने वाला भी कोई नहीं है।
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स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने विधानसभा में कहा था कि अब सरकारी कार्यालयों व सार्वजनिक स्थलों पर आने वाले हर व्यक्ति का वैक्सीनेशन प्रमाण-पत्र देखा जाएगा। हालांकि उन्होंने यह व्यवस्था एक जनवरी से लागू करने की बात कही थी लेकिन जिला प्रशासन ने इसे पहले ही लागू कर दिया था। लघु सचिवालय व एसपी ऑफिस में वीरवार व शुक्रवार को यह व्यवस्था रही। नागरिक अस्पताल में भी शुक्रवार को यही व्यवस्था शुरू की गई लेकिन अब पूरी तरह से प्रशासन ने पहले की तरह ही छूट दे दी है। अब किसी भी सरकारी कार्यालय में कोई वैक्सीनेशन प्रमाण-पत्र नहीं देखा जाता। हालांकि वैक्सीन लगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारी बैठे थे। नागरिक अस्पताल में प्रवेश के समय किसी भी व्यक्ति से कोई वैक्सीनेशन प्रमाण-पत्र नहीं देखा जा रहा और न ही यहां मुख्य गेट पर वैक्सीन लगाने की कोई व्यवस्था थी। अस्पताल में लोग बिना मास्क के ऐसे ही घूम रहे थे। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन खिड़की पर लोग बिना मास्क लगाए एक-दूसरे से सटकर खड़े थे। पहली व दूसरी कोरोना लहर में नागरिक अस्पताल के कर्मचारी व चिकित्सक संक्रमित हुए थे। इस समय तीसरी लहर के लिए कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को जिम्मेदार बताया जा रहा है। तीसरी लहर से बचने के लिए लोगों को मास्क लगाने की जरूरत है लेकिन अब भी लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में बिना मास्क लगाए लोगों का प्रवेश प्रतिबंध किया गया है। कर्मचारियों को इस बारे में निर्देश दिए गए हैं। हर व्यक्ति को अस्पताल के अलावा घर से बाहर निकलते ही मास्क जरूर लगाना चाहिए। जिन कर्मचारियों की अस्पताल के मुख्य गेट पर ड्यूटी है, उनसे इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
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-जेएस पूनिया, सिविल सर्जन।
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