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म्यूनिसिपल कमिश्नर ने संभाला कार्यभार, बोले-विवादों का समाधान किया जाएगा

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कार्यालय में मौजूद कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान व म्यूनिसिपल कमीश्नर डॉ. सुशील कुमार। - फोटो : Jind
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जींद। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान, पार्षद हरेंद्र उर्फ काला सैनी और भाजपा नेता व चेयपर्सन पूनम सैनी के पति जवाहर सैनी के बीच चल रहे विवाद के बीच जिला म्यूनिसिपल कमिश्नर डॉ. सुशील कुमार ने कार्यभार संभाल लिया है। डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि वे इस विवाद को देखेंगे और फिर इसका समाधान किया जाएगा। वहीं उन्होंने कहा कि पहला लक्ष्य सभी नगरपालिका व परिषदों में चल रहे विकास कार्यों को गति देना है। इसके लिए बुधवार को सभी नगर परिषद व पालिकाओं के अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई है।
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सोमवार सुबह म्यूनिसिपल कमिश्नर डॉ. सुशील कुमार अपने कार्यालय पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि उन्हें पूरे विवाद का पता नहीं है। ऐसे में वे इसका पता लगाएंगे और इसका समाधान किया जाएगा। गौरतलब है कि 17 जुलाई को कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान व पार्षद काला सैनी और जवाहर सैनी के बीच विवाद हुआ था। कार्यकारी अधिकारी का कहना है कि यह लोग उनसे निजी फायदे के लिए गलत काम करवाना चाहते हैं, जबकि जवाहर सैनी व काला सैनी का कहना है कि कार्यकारी अधिकारी मनमानी चला रहे हैं। इसको लेकर कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर जवाहर सैनी व काला सैनी के खिलाफ एससी-एसटी कानून के तहत केस भी दर्ज हुआ है।
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म्यूनिसिपल कमिश्नर के समक्ष चुनौतियां
हालांकि सरकार ने पालिकाओं और परिषदों का काम सुचारू करने के लिए म्यूनिसिपल कमिश्नर नियुक्त कर दिए हैं, लेकिन जींद में अधिकारी का काम आसान नहीं होगा। जींद नगर परिषद में जन्म-मृत्यु के रिकार्ड में छेड़छाड़ से लेकर, कंप्यूटर तक गायब हो चुके हैं। कई ऐसी फाइल हैं, जो कार्यालय में नहीं मिल रही। इस पर कार्यकारी अधिकारी के साथ विवाद भी है। इन सभी के बीच विकास कार्यों पर फोकस करना चुनौतीपूर्ण है।
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अब नया विवाद
17 जुलाई को हुए झगड़े के बाद नया विवाद भी आ गया है। इसमें चेयरपर्सन पूनम सैनी का कहना है कि उन्होंने कार्यकारी अधिकारी को दस अगस्त को रिलीव कर दिया। यह सब चार जुलाई को आए तबादला आदेश के आधार पर किया गया है। वहीं कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान का कहना है कि उन्हें तबादले और रिलीव के बारे में काई जानकारी नहीं है।
तबादले पर अदालत से स्टे
कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान का कहना है कि उन्होंने तबादले पर स्टे लिया हुआ है। जब उनसे पूछा गया कि जब तबादला हुआ ही नहीं है तो स्टे किस आधार पर लिया। उन्होंने बताया कि यह सब उनके वकील को पता है, उन्होंने कहां से पत्र निकाला है। वहीं इस पर म्यूनिसिपल कमिश्नर डॉ. सुशील कुमार कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है।
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विकास कार्यों को गति देना पहला लक्ष्य
सोमवार को कार्यभार संभालने के बाद म्यूनिसिपल कमिश्नर डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि उनका प्रथम लक्ष्य रुके हुए कामों को गति देना है। शहर की सफाई व्यवस्था और लावारिस पशुओं का प्रबंधन करना है। डॉ. सुशील कुमार के अनुसार जिले की नगर परिषदों व पालिकाओं के अधीन आने वाले सभी धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की पहचान कर उन्हें पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से भी लोग यहां आ सकें।
फिर नया पेंच
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान के विवाद में फिर नया पेंच आ गया है। एक तरफ तो चेयरपर्सन पूनम सैनी का कहना है कि कार्यकारी अधिकारी को दस अगस्त को ही रिलीव कर दिया गया है, दूसरी ओर 11 अगस्त वेतन व अन्य चेक पर कार्यकारी अधिकारी व चेयरपर्सन के संयुक्त हस्ताक्षर हुए हैं। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया और उठापठक पर सवाल उठ रहे हैं।
स्टेशन पर है अधिकारी तो हो सकते हैं हस्ताक्षर
दस अगस्त को रिलीव होने के बाद भी यदि अधिकारी 11 अगस्त को स्टेशन पर हैं तो उनके हस्ताक्षर करवाए जा सकते हैं। यह कोई बड़ा मामला नहीं है। कार्यकारी अधिकारी को 10 अगस्त को रिलीव किया जा चुका है।
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- पूनम सैनी, चेयरपर्सन, जींद नगर परिषद।
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