29जेएनडी19: श्रद्धालुओं को कथा का संदेश देते स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती महाराज। आयोजक
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सफीदों। श्री कृष्ण भक्ति भागवत समिति के तत्वावधान में पितृ पक्ष के उपलक्ष्य में ऐतिहासिक नागक्षेत्र सरोवर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रद्धालुओं को भक्ति और सदाचार का संदेश दिया गया। कथा व्यास पीठाधीश्वर परम स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती महाराज ने अजामिल प्रसंग का वर्णन करते हुए भगवान के नाम की महिमा बताई।
स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भगवान का नाम कभी व्यर्थ नहीं जाता। अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा था। जीवन के अंतिम समय में पुत्र को पुकारते हुए उसके मुख से नारायण नाम निकला। भगवान के नाम का स्मरण होते ही भगवान विष्णु के पार्षद वहां पहुंचे और अजामिल को भक्ति का मार्ग अपनाने का अवसर मिला। बाद में उसने भगवान की भक्ति की और उनके धाम को प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि अजामिल प्रसंग भगवान के नाम की महिमा बताता है लेकिन मनुष्य को जीवन के अंतिम समय का इंतजार नहीं करना चाहिए। जीवन रहते ही सत्य, धर्म, सदाचार और भक्ति को अपनाना जरूरी है। भगवान का स्मरण और सत्संग मनुष्य को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का नाम लेने और सद्कर्म करने का आह्वान किया।
कथा के दौरान भक्त प्रह्लाद के जन्म और हिरण्यकश्यप के प्रसंग का भी वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु से वैर रखता था, जबकि उसका पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। पिता के अनेक प्रयासों के बावजूद प्रह्लाद की भक्ति नहीं डिगी। जब हिरण्यकश्यप ने पूछा कि उसका भगवान कहां है तो प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि भगवान हर जगह हैं।
इसके बाद भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया। इस अवसर पर धर्मबीर धीमान, नरेंद्र शास्त्री, विजय कौशिक, प्रमोद कौशल, बलबीर धीमान और संजीव गौतम मौजूद रहे।