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Jind News: 15 साल बाद जागी नगर परिषद, सफीदों गेट की करोड़ों की जमीन पर शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनाने की तैयारी

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01जेएनडी01: सफीदों रोड पर बदहाल हालात में पड़ी नगर परिषद की जमीन। संवाद
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जींद। सफीदों गेट पर फायर ब्रिगेड कार्यालय के पास नगर परिषद की करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन को 15 साल बाद उपयोग में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर परिषद की हाउस बैठक में जमीन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, दुकानें या अधिकारियों के क्वार्टर बनाने के विकल्पों पर विचार किया गया था। इनमें तीनों में से जिस भी योजना को मंजूरी मिलेगी, उसका एस्टीमेट तैयार कर मुख्यालय को भेजा जाएगा।
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शहर के बीचों-बीच स्थित इस जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल से नगर परिषद की आय बढ़ने की भी उम्मीद है। वर्ष 2024 में दिव्य नगर योजना के तहत यहां शोरूम बनाने की योजना बनी थी लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ सकी। अब परिषद ने जमीन को लंबे समय से चली आ रही बदहाली से निकालकर विकसित करने का निर्णय लिया है।

फिलहाल इस जमीन पर सफीदों गेट स्थित फायर ब्रिगेड कार्यालय संचालित है। शहर के व्यस्त मार्गों और जाम के कारण दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में होने वाली देरी को देखते हुए फायर स्टेशन को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की तैयारी है।
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अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की जींद विकास एवं धन्यवाद रैली में फायर स्टेशन को पुराने बस स्टैंड की कर्मशाला में स्थानांतरित करने की घोषणा की गई थी। इसके अलावा हुडा क्षेत्र में भी जमीन देखी गई है। अगर नगर परिषद की तरफ से यहां पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स या दुकान बनाने की मंजूरी मिली तो इससे नगर परिषद की आमदनी भी बढ़ेगी।

फायर स्टेशन की साइट का निरीक्षण कर लिया था जायजा
नगर परिषद की जमीन पर जनस्वास्थ्य विभाग के दो ट्यूबवेल भी लगे हैं। इन्हें भी दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना है। जनवरी 2025 में तत्कालीन नगरायुक्त गुलजार मलिक ने फायर स्टेशन की साइट का निरीक्षण कर स्थानांतरण की संभावनाओं का जायजा लिया था। उस दौरान शहर के व्यस्त मार्गों और जाम के कारण दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में होने वाली देरी का मुद्दा सामने आया था।

बॉक्स
फायर स्टेशन के स्थानांतरण के बाद सफीदों गेट की नगर परिषद जमीन के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता साफ होगा। करीब दो दशक से उपेक्षित पड़ी जमीन विकसित होने पर यहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स या दुकानें बनने से नगर परिषद को आय का नया स्रोत मिलने की संभावना है। हालांकि अंतिम रूप से कौन-सी योजना लागू होगी, यह परिषद और मुख्यालय की मंजूरी के बाद ही तय होगा।
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-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद जींद।
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