यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे विवाद के बीच यूक्रेन में काफी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं। इनमें से 100 से अधिक विद्यार्थी हरियाणा के जींद जिले के भी हैं। हालांकि प्रशासन के पास इनका कोई भी अधिकृत आंकड़ा नहीं है। वहीं पढ़ाई के लिए बच्चों को विदेश भेजने वाली परामर्शदाता कामिनी आसरी के अनुसार यूक्रेन में रह रहे विद्यार्थियों से उनकी बात हुई है। वहां पर हालात बदतर बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने बताया कि वे स्वदेश आने के लिए अपने हॉस्टल व घरों से निकलते थे लेकिन फ्लाइट बंद मिली। इससे वे लोग वापस ही जा रहे थे। ऐसे में कुछ विद्यार्थियों की गाड़ियों के पास बमबारी होने पर विद्यार्थी खेतों में छिपे हुए हैं।
वहीं जो विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हुए हैं उनके परिजन भी चिंतित हैं। हालांकि फोन पर बात हो रही है लेकिन इंटरनेट सेवा बाधित होने से फोटो व वीडियो कॉल नहीं हो पा रही हैं। शहर के अर्बन एस्टेट निवासी तरुण, नीवा, सिद्धार्थ, हाउसिंग बोर्ड निवासी जतिन, रोहतक रोड निवासी खुशबू मलिक ने कामिनी आसरी को वहां की स्थिति के बारे में जानकारी दी है।
इनमें से अधिकतर विद्यार्थी खारकीव नामक क्षेत्र में हैं और कुछ विद्यार्थी राजधानी कीव में हैं। सबसे अधिक बमबारी खारकीव में हो रही है। वहीं कीव में रहने वाले विद्यार्थियों के परिजनों ने बताया कि वहां फिलहाल हालात सामान्य हैं लेकिन लोगों में बेचैनी व डर साफ देखा जा सकता है।
फ्लाइट शुरू होने का इंतजार
परिजनों ने बताया कि काफी विद्यार्थियों ने भारत लौटने के लिए टिकट बुक करवाई हैं लेकिन फिलहाल फ्लाइट बंद हो गई हैं। ऐसे में उन्हें एयरपोर्ट से वापस आना पड़ रहा है।
सरकार जल्द निकाले बच्चों को
केंद्र सरकार को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। यूक्रेन में फंसे सभी भारतीयों को एयर लिफ्ट कर निकालना चाहिए। इसके लिए सरकार की तरफ से अभी तक कोई ऐसी जानकारी नहीं दी गई है जिससे बच्चों के परिजनों को कुछ हौसला मिले। मैंने देश भर से बच्चों को पढ़ाई के लिए यूक्रेन भेजा है। ऐसे में बच्चों से संपर्क किया जा रहा है लेकिन वहां पर हालात काफी खराब हैं। -कामिनी आसरी, करियर परामर्शदाता।
जींद के विद्यार्थियों की नहीं जानकारी : डीसी
इस मामले में कोई भी अभिभावक अभी तक प्रशासन के पास नहीं आया है। न ही जिले के विद्यार्थियों की कोई सूची है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने लोगों की मदद के लिए नंबर जारी कर दिए हैं। ऐसे में लोगों को वहां संपर्क कर सहायता लेनी चाहिए। -डॉ. मनोज कुमार, डीसी।