टिकरी बॉर्डर पर रविवार सुबह गांव सिंघवाल निवासी 50 वर्षीय जिस किसान कर्मबीर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, उसका शव देर शाम को गांव पहुंचा। कर्मबीर के अंतिम संस्कार में धरने से व आसपास के गांवों से सैकड़ों किसान शामिल हुए। किसानों के कर्मबीर अमर रहे के नारे लगाए। किसानों ने कहा कि कर्मबीर की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। बता दें कि कर्मबीर ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसमें उसने कहा कि सरकार तारीख पर तारीख दे रही है, लेकिन कोई समाधान नहीं कर रही।
परिजनों के अनुसार कर्मबीर किसान आंदोलन में शुरुआत से ही सक्रिय था। चार दिन पहले ही दिल्ली जा रहे ट्रैक्टरों में सवार होकर टीकरी बॉर्डर पर गया था। कर्मबीर ने दिल्ली जाते समय कहा था कि सरकार कानूनों की आड़ में उनकी जमीन को हड़पना चाहती है। अब वह कानून वापस नहीं होने तक टीकरी बॉर्डर से वापस नहीं आएगा। भतीजे संदीप ने बताया कि चाचा कर्मबीर के नाम एक एकड़ जमीन है। उसी जमीन पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। कर्मबीर की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि बेटियों की शादी नहीं हुई है।
यह लिखा सुसाइड नोट में
कर्मबीर के पास से जो सुसाइड नोट बरामद हुआ है उसमें लिखा है कि भारतीय किसान यूनियन जिंदाबाद। प्यारे किसान भाइयो, यह मोदी सरकार तारीख पर तारीख देती जा रही है। इसका कोई अंदाजा नहीं कि यह काले कानून कब रद्द होंगे। जब तक यह कानून रद्द नहीं होंगे, तब तक हम यहां से नहीं जाएंगे।
अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ी लोगों की भीड़
कर्मबीर का शव एंबुलेंस से सिंघवाल गांव में उनके निवास पर पहुंचा। परिजनों के अंतिम दर्शन करने के बाद शव को ग्रामीणों ने भाकियू के झंडे में लपेटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सजा कर रखा। शव को गांव के स्टेडियम में ले जाया गया, जहां पर अलग-अलग गांवों से आए किसानों ने अंतिम दर्शन किए। उसके बाद शव को घर पर ले जाया गया। फिर शव को श्मशानघाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। पूर्वमंत्री रामपाल माजरा समेत अन्य नेता भी कर्मबीर के अंतिम संस्कार में पहुंचे।
कर्मबीर का शव घर पहुंचने पर विलाप करतीं उनकी बेटियां और पत्नी। संवाद - फोटो : Jind