दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर अब तीन फरवरी को नए सिरे से कंडेला खाप के ऐतिहासिक चबूतरे पर रणनीति बनेगी। उस दिन भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत यहां आएंगे। इस दौरान लगभग 50 खापों के लोग इसमें भाग लेंगे। आंदोलन को सफल बनाने के लिए नई रणनीति बनाएंगे।
28 जनवरी को जब किसान आंदोलन दम तोड़ता नजर आ रहा था तो रात को ही कंडेला खाप के लोगों ने जींद-चंडीगढ़ हाईवे जाम करके आंदोलन को नई संजीवनी दी थी। इसके बाद पूरे हरियाणा के लोग रात को ही गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत के पास पहुंच गए थे। अब फिर से तीन फरवरी को यहां होने वाली राकेश टिकैत की महापंचायत में इस आंदोलन को नई ऊर्जा मिलेगी।
बता दें कि भारतीय किसान यूनियन के प्रभाव में कंडेला खाप के काफी गांव रहे हैं। जब 2002 में बिजली बिलों को लेकर भाकियू का आंदोलन चल रहा था तो पूरे आंदोलन का केंद्र कंडेला गांव था। यहां लोगों ने पुलिस अधिकारियों को बंधक बना लिया था। उस समय ओमप्रकाश चौटाला प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। यहां चली गोलियों में नौ किसानों की मौत हो गई थी, जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला 2005 तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन वह कभी कंडेला गांव के रास्ते से जींद नहीं आए। लगभग सात साल बाद 2009 में कंडेला गांव में दुष्यंत चौटाला पहुंचे थे। इस प्रकार यह गांव अपने फैसलों के प्रति कठोर माना जाता है तथा अब तक भाकियू के जितने भी आंदोलन हुए सबसे में कंडेला खाप की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब फिर से दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर कंडेला खाप तैयार हो रही है। तीन फरवरी को राकेश टिकैत यहां पर एक पंचायत में भाग लेंगे। सर्वजातीय सर्वखाप एवं कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने कहा कि इस दिन पूरे प्रदेश से लगभग 50 खापों के लोग इस महापंचायत में आएंगे तथा भविष्य की रणनीति बनाई जाएगी।
कंडेला गांव के लोग हैं रणनीतिकार
भाकियू के प्रांतीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला भाकियू के रणनीतिकार माने जाते हैं। हर आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बिजली, पानी हो या फिर अन्य कोई मामला, जितना रामफल कंडेला को ज्ञान है, उतना विभाग के अधिकारियों को भी नहीं है। हर आंदोलन में रामफल कंडेला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कैसे लोगों को संगठित करना है, कैसे अधिकारियों से बात मनवानी है तथा कैसे किसानों का पक्ष मजबूती के साथ रखा जाता है, इस सभी बातों को रामफल कंडेला को बारीकी से ज्ञान है।
भावुकता से जुड़ेगी भीड़
28 जनवरी की रात को जब राकेश टिकैत की आंखों से आंसू निकले तो लोग काफी भावुक हो गए थे। इसी कारण रात को जींद से भी काफी संख्या में लोग गाजीपुर बॉर्डर पहुंच गए थे। जिस नेता की आंखों में लोग आंसू नहीं देख सके उसका स्वागत करने के लिए पूरे जिले के लोग तैयारियों में जुट गए हैं। हर गांव में इसकी सूचना दी गई है, इसलिए भीड़ के मामले में भी तीन फरवरी की कंडेला में होने वाली पंचायत काफी महत्वपूर्ण होगी।
भाकियू के प्रांतीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला। संवाद - फोटो : Jind