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अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग फसलों के लिए घातक : डॉ. सिहाग

Sat, 18 Mar 2023 12:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। दो साल से गुलाबी सूंडी की मार झेल रहे कपास फसल उत्पादक किसानों को इस बार काफी राहत मिलने की उम्मीद है। कृषि विभाग ने किसानों के साथ-साथ कीटनाशक विक्रेताओं को प्रशिक्षण देने शुरू किया है। गुलाबी सूंडी पर कौन सा कीटनाशक तथा किस समय ज्यादा प्रभाव डालेगा, उसके बारे में शुक्रवार को प्रशिक्षण दिया गया। कपास विभाग सिरसा के संयुक्त निदेशक डॉ. रामप्रताप सिहाग ने कहा कि अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग फसलों के लिए घातक है। इससे किसान मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे दुश्मन कीटों को बढ़ावा मिलता है। रोहतक रोड स्थित हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं प्रशिक्षण केंद्र में शुक्रवार को प्रदेशभर से आए कीटनाशक विक्रेताओं को कृषि अधिकारियों ने प्रशिक्षण दिया गया।
सिरसा में स्थित कपास प्रबंधन संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. रामप्रताप सिहाग ने कहा कि कपास की फसल की बिजाई 15 अप्रैल से 15 मई के बीच में करनी चाहिए। इससे पहले तथा बाद में कपास की फसल में बीमारी अधिक आती हैं। किसानों को किस समय कौन से कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए, इसके बारे में कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक ने कहा कि किसान कीटनाशक विक्रेताओं पर अधिक भरोसा करते हैं, इसलिए कीटनाशक विक्रेताओं को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि किस समय किसान को कितनी मात्रा में कौन सा कीटनाशक देना चाहिए। कीटनाशक विक्रेताओं को फसल में होने वाली बीमारी के बारे में जानकारी होनी चाहिए। तकनीकी सहायक डॉ. वीरेंद्र ने कहा कि बहुत से कीट ऐसे हैं, जो किसानों के मित्र होते हैं। यह कीट फसल को नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाते हैं। कई दुकानदार किसानों को एक साथ दो या तीन कीटनाशक मिलाकर स्प्रे की सलाह देते हैं, जो सबसे ज्यादा खतरनाक है। इससे किसान मित्र कीट भी मर जाते हैं तथा जो दुश्मन कीट हैं, उनकी संख्या बढ़ जाती है। इस मौके पर संस्थान के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह चौहान, एसडीओ डॉ. बलजीत सिंह, डॉ. बलजीत लाठर, डॉ. सुशील गुप्ता, डॉ. सत्यवान आर्य भी मौजूद रहे।
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केवल एक प्रतिशत कीटनाशक आती है काम
डॉ. वीरेंद्र ने कहा कि जब किसान फसलों पर कीटनाशक का प्रयोग करते हैं तो उसका केवल एक ही प्रतिशत कीटों पर प्रभाव डालता है। 33 प्रतिशत कीटनाशक हवा में उड़ जाती है। 33 प्रतिशत कीटनाशक धरती में चली जाती है और 33 प्रतिशत कीटनाशक पौधे पर खर्च होती है। केवल एक प्रतिशत कीटनाशक ही कीट पर असर डालती है। इसलिए कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग फसलों व किसान दोनों के लिए खतरनाक है।
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