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आधे-अधूरे स्टाफ से कैसे मिलेगा सेवा का अधिकार

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नगरपरिषद में काम करवाने पहुंचे लोग। - फोटो : Jind
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एक ओर तो सरकार सेवा का अधिकारको सख्ती से लागू करने की योजना बना रही है, दूसरी ओर सबसे अधिक जन जुड़ाव वाले नगर परिषद में ही कर्मचारियों की भारी कमी है। इसके चलते क्लर्क का काम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का काम सफाईकर्मियों से लिया जा रहा है। वहीं कई अधिकारियों के पास एक से अधिक नगरपरिषद व पालिकाओं का भी चार्ज है। ऐसे में लोगों के काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं।
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जींद नगर परिषद में सहायक नगर योजनाकार, कर निरीक्षक, ड्राफ्ट्समैन के पद खाली हैं। इसके अलावा क्लर्क के काफी पद खाली पड़े हैं। कार्यकारी अधिकारी, एक्सईएन, एमई, जेई के पास भी दो-दो जगह का काम रहता है। इसके चलते हालांकि सभी काम प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी प्रोपर्टी कर, आईडी व जन्म-मृत्यु के काम हो रहे हैं। यह काम पूरी तरह से कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हवाले हैं।
नगर परिषद में 500 से अधिक पद खाली
नगर परिषद में सचिव और कार्यालय अधीक्षक का पद खाली है। यह कार्यालय का सबसे महत्वपूर्ण काम देखते हैं। वहीं लेखा क्लर्क का एक, जमादार के आठ पद स्वीकृत हैं, जबकि आधे खाली हैं। ट्रैक्टर ड्राइवरों के तीनों पद रिक्त हैं। सफाई कर्मचारियों के 229 पद स्वीकृत हैं, जबकि जनसंख्या के आधार पर यह पद 400 से अधिक होने चाहिए।
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प्रॉपर्टी आईडी को लेकर रहती हैं शिकायत
इसके चलते प्रॉपर्टी आईडी के लिए लोगों की शिकायत रहती हैं। दरअसल इस काम में फाइल पूरे कार्यालय में घूमती है। इसके चलते कई बार फाइल गुम भी हो जाती है। आम लोगों के साथ-साथ कई पार्षद भी उनकी फाइल गुम होने की शिकायत अधिकारियों को करते रहते हैं।
कम स्टाफ में भी पूरी सेवा का लक्ष्य
हां स्टाफ कम है, लेकिन लोगों को दिक्कत नहीं आने दी जा रही हैं। सेवा का अधिकार के तहत नगरपरिषद जो सेवाएं आती हैं, सभी में अच्छा काम हो रहा है। कम स्टाफ के बावजूद पूरी सेवा दी जा रही है। स्टाफ सरकार को मुहैया करवाना है, लेकिन लोगों को निर्बाध सेवा के लिए प्रयास रहता है।
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-सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी।
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