कैप्टन बनवारी लाल का फाइल फोटो।
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जींद। गांव खेड़ी मसानियां के पूर्व सरपंच, समाजसेवी एवं ऑनरेरी कैप्टन 82 वर्षीय बनवारी लाल का शनिवार को निधन हो गया। गांव में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके प्रोफेसर बेटे रमेश मेहरा ने उन्हें मुखाग्नि दी।
प्रो. रमेश मेहरा ने बताया कि उनके पिता ने सन 1962, 1965 व 1971 युद्ध में दुश्मनों का सामना किया। वर्ष 1971 में अटारी बॉर्डर से होते हुए लाहौर में जाकर अपनी रेजीमेंट के साथ नाश्ता किया था। 32 वर्ष तक देश की सेवा करते हुए 1990 में सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। बाद में भारत सरकार ने उन्हें मानद कैप्टन से विभूषित किया। मेहरा ने कहा कि उन्होंने गांव में पीने के पानी की समस्या को दूर करने के लिए कुआं बनवाया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें 48 गांवों का प्रधान भी चुना गया। उनके जीवन पर आधारित दादा-फौजी उपन्यास प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने स्वयं भी गुरु रविदास सतवाणी पर पुस्तक लिखी थी।