27जेएनडी36: हिमांशु ढिल्लों को जींद से खुली जीप में बैठाकर ढोल नगाड़ों के साथ डाहौला गांव में ल
जींद। एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर राइफल की व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में दो रजत पदक जीतकर लौटे जींद के गांव डाहौला निवासी निशानेबाज हिमांशु ढिल्लों का परिवार ने ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया। मां सुमन ने बेटे का माथा चूमा और खुशी से भावुक हो गईं। पिता शमशेर सिंह, चाचा संदीप ढिल्लों और चाची किरण समेत परिवार के लोगों ने हिमांशु को फूल-मालाएं पहनाकर बधाई दी।
हिमांशु ने एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर राइफल के व्यक्तिगत मुकाबले में रजत पदक जीता जबकि टीम स्पर्धा में भी भारत को रजत दिलाया। टीम में उनके साथ रुद्रांक्ष पाटिल और पार्थ माने शामिल रहे। हिमांशु का बचपन से ही खेलों के प्रति लगाव था।
शुरुआत में उन्होंने कुश्ती को अपनाया और परिवार की इच्छा भी उन्हें पहलवान बनाने की थी। प्रशिक्षण के दौरान बचपन में चोट लगने के बाद उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी। इसके बाद शूटिंग की ओर कदम बढ़ाया और धीरे-धीरे एयर राइफल में अपनी पहचान बना ली। परिवार के अनुसार पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं थी लेकिन खेल के प्रति जुनून शुरू से था। परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद उसके प्रशिक्षण में कोई कमी नहीं आने दी। चाचा संदीप के अनुसार परिवार ने हिमांशु के खेल को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग किया।
अब निशाना ओलंपिक के गोल्ड पर
दो रजत पदक जीतने के बाद हिमांशु और परिवार की नजर अब ओलंपिक पर है। परिवार का सपना है कि बेटा देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते। हिमांशु भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए इस सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं। परिवार ने कहा कि एशियन गेम्स के पदक उसकी मेहनत के साथ पूरे परिवार के त्याग और सहयोग का परिणाम हैं।