जींद-रोहतक रोड पर मंगलवार देर शाम कैंटर और ट्राले की टक्कर में करनाल जिले के गंगाटेहड़ी गांव निवासी सुशील कुमार की मौत हो गई। सुशील मधुमक्खी का व्यवसाय करता था। वह अपने दो भाइयों के साथ एक कैंटर में सवार होकर गिलौड़ मधुमक्खी के डिब्बे रखकर गांव लौट रहा था। जब वह जींद-रोहतक रोड बाईपास पर पहुंचा तो एक ट्राले से कैंटर की टक्कर हो गई, जिसमें वह बुरी तरह से घायल हो गआ। इसमें उसके दोनों भाइयों को बी चोट आई।
मृतक के चचेरे भाई सतीश ने बताया कि वह मधुमक्खी का व्यवसाय करते हैं। मंगलवार सुबह वह गिलौड़ में मधुमक्खी के डिब्बे उतारने के लिए गए थे। डिब्बों को उतारने के बाद शाम को लौट रहे थे। इस दौरान जब वह जींद-रोहतक बाईपास पर पहुंचे तो सामने से आ रहे एक ट्राले ने उनके कैंटर को टक्कर मारी। घटना को अंजाम देकर ट्राला चालक गाड़ी लेकर मौके से फरार हो गया ट्राले समेत मौके से फरार हो गया।। उन्होंने बताया कि टक्कर लगने के बाद उनका कैंटर डिवाइडर पर चढ़ गया। उन्होंने घायल भाई सुशील को अस्पताल पहुंचाने के लिए राहगीरों की मदद मांगी, लेकिन कोई आग नहीं आया। इसके बाद उन्होंने डिवाइडर पर चढ़े कैंटर को उतारा और घायल भाई को नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया। जहां पर चिकित्सकों ने सुशील को मृत घोषित कर दिया। सड़क दुर्घटना में मृतक सुशील के चचेरे भाई सतीश व सुरेश को भी चोटें आई। घटना की जानकारी मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटना का जायजा लिया। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर बुधवार सुबह पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सौंप दिया। सदर थाना प्रभारी ने मृतक सुशील के चचेरे भाई सतीश की शिकायत पर अज्ञात फरार ट्रॉला चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
राहगीर सहायता करते तो बच सकती थी सुशील की जान
आज भी सड़क हादसे का शिकार हुए लोगों की सहायता करने के लिए आम व्यक्ति आगे नहीं आ रहा है। अगर सड़क हादसे में घायल की सहायता के लिए लोग आग आएं तो इनकी जान बचाई जा सकती है। ऐसे ही हादसे का शिकार गंगाटेहड़ी निवासी सुशील हुआ। सड़क हादसे के बाद लगभग 20 मिनट तक उसके भाई राहगीरों से सहायता की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई भी व्यक्ति घायल की सहायता के लिए आगे नहीं आया। इसके पुलिस प्रशासन ने जिला में सड़क हादसे में घायल होने वालों की सहायता करने के लिए प्रेरित करने का काम किया जाता है।