जींद। निजी अस्पतालों की तर्ज पर सरकारी अस्पतालों को भी आयुष्मान कार्ड धारक का इलाज करने पर सरकार से पैसे मिल रहे हैं। पहले इस बात की सरकारी अस्पताल संचालकों को जानकारी नहीं थी, लेकिन अब हर सरकारी अस्पताल करीब पांच से 10 लाख रुपये प्रतिमाह की आय इस फंड से करने लगे हैं। ये रकम अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने में इस्तेमाल हो रही है।
आयुष्मान कार्ड गरीब लोगों के लिए एक तरह का बीमा है। कार्ड धारक को एक वर्ष में पांच लाख रुपये तक का फ्री इलाज मिलता है। यह आयुष्मान कार्ड सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जैसे नागरिक अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चलता है। ये सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थाएं इस कार्ड के पैनल पर हैं। इसके अलावा काफी निजी अस्पताल भी इसके पैनल में हैं। मरीज चाहे तो सरकारी अस्पताल में या पैनल वाले प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज करवा सकता है। उसका काेई खर्च नहीं लगता। यह आयुष्मान कार्ड पूरी तरह से कैशलेस है। मतलब कार्ड दिखाने के बाद मरीज को कोई पैसा नहीं देना होता।
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ऐसे मिलते हैं नागरिक अस्पतालों को पैसे
अस्पताल आने वाले मरीज से ऑपरेशन आदि के लिए आयुष्मान कार्ड मांगा जाता है। इसके बाद उसकी अनुमति के लिए स्वास्थ्य निदेशालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। अनुमति मिलने के बाद जितने रुपये का बिल बनता है, वह मरीज की छुट्टी होने के बाद मुख्यालय में भेज दिया जाता है। इस बिल के बदले सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को पैसे मिलते हैं। यही नियम निजी अस्पतालों पर लागू होता है। नागरिक अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले 60 फीसदी मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड होता है, केवल उससे जानकारी हासिल करके उसका आयुष्मान कार्ड नंबर सरकारी अस्पतालों को प्राप्त करना होता है।
-पिछले तीन माह से हम आयुष्मान कार्ड धारक की फाइल बनाकर निदेशालय भेज रहे हैं। पिछले माह 10 लाख रुपये का बिल भेजा गया था। अब तक एक लाख रुपये आ भी चुके हैं। नरवाना के नागरिक अस्पताल में भी एक लाख रुपये आ चुके हैं। जिस पीएचसी, सीएचसी या नागरिक अस्पताल का बिल होता है, उसी के खाते में पैसे आते हैं।
-डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।