14जेएनडी34: कालवन गांव के तालाब में मौजूद पक्षी। संवाद
नरवाना। इस बार गर्मी समय से पहले शुरू हो गई। इसका प्रभाव कालवन स्थित वेटलैंड में आए प्रवासी पक्षियों पर भी पड़ रहा है। सर्दियों में जो प्रवासी जल पक्षी आए थे। उनमें से अधिकतर वापस चले गए हैं। हरियाणा वन्यजीव विभाग की ओर से मार्च 2025 में कालवन गांव स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती प्रवासी पक्षी सरंक्षण स्थल को संरक्षण के लिए सामुदायिक रिजर्व घोषित किया गया है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और मानवीय हस्तक्षेप के कारण लगभग हर जगह प्राकृतिक आवास में कमी आने से पक्षियों की संख्या में भी कमी आ रही है। इससे देश में वैश्विक खतरा उत्पन्न हो रहा है। हाल ही में प्रारंभिक गर्मी के मौसम में प्रख्यात पक्षी विशेषज्ञ टीके राय वेटलेंड इंटरनेशनल साउथ एशिया न्यू दिल्ली ने बीएमसी सदस्य कपिल आर्य, संरक्षण कार्यकर्ता कर्नल रामप्रताप नैन, स्थानीय संरक्षण समूह में आर्य सोनू, आर्य बलजीत, आर्य राजेंद्र की भागीदारी से गांव में स्थित प्रवासी पक्षी सामुदायिक संरक्षण केंद्र में ग्रीष्मकालीन सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण करने के बाद टीके रॉय ने जानकारी देते हुए बताया कि 28 जल पक्षियों की प्रजातियां अब भी कालवन वेटलेंड में मौजूद हैं, लेकिन जनवरी 2025 में सर्दियों की तुलना में कम है। एशियाई जल पक्षी जनगणना में 34 जल पक्षी प्रजातियों को दर्ज किया गया था। रॉय ने बताया कि आश्चर्य जनक रूप से अभी भी 28 प्रजातियों का इस वेटलेंड पर मिलना संकेत करता है कि जलीय आवास इनके लिए उपयुक्त है। तैरने वाली बत्तख, गीज प्रजातियों की अधिकांश प्रजातियां पहले से ही उत्तरी मध्य एशिया में अपने स्वयं के क्षेत्र में चली गई हैं। इसमें साइबेरियन भी शामिल है। देश के अन्य हिस्सों से अपने मध्य एशिया फ्लाईवे मार्ग में वापसी यात्रा करते हुए कुछ और प्रजातियां भोजन के लिए कुछ दिन के लिए कालवन वेटलैंड में उतरें हैं। जिन्हें जनवरी में दर्ज नहीं किया गया था। जनवरी में दर्ज की गई शीतकालीन प्रवासी पक्षियों की कुछ प्रजातियां अभी भी गर्मियों में मौजूद है।
2025 में 34 जल पक्षी प्रजातियों को किया गया दर्ज
एशियाई जल पक्षी जनगणना के अनुसार जनवरी 2025 में वेटलैंड पर कुल 34 जल पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें 13 भारतीय प्रजातियां प्लस 21 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। इनमें चार खतरे ग्रस्त प्रजातियां हैं, लेकिन अब हाल ही में गर्मियों की शुरुआत में कुल 28 जल पक्षियों की प्रजातियां दर्ज की गई हैं। जिनमें 16 भारतीय हैं ,जबकि 12 प्रजातियां शीतकालीन प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। जिनमें से कुछ प्रजातियां जनवरी में दर्ज नहीं किए गए।
कालवन वेटलैंड में उचित प्रबंधन की आवश्यकता
गांव के सीवेज का पानी कालवन के वेटलैंड में प्रवाहित हो रहा है। इससे इसका रंग गहरा होने से यह गंदा हो रहा है। इससे जलीय जीवन और जलीय पक्षियों के लिए प्रतिकूल स्थिति पैदा हो रही है और उनकी संख्या में कमी आ रही है। साथ ही सर्दियों में प्रवासी जलीय पक्षी भविष्य में इनकी संख्या ओर प्रजातियों के कम होने की संभावना है। इसके अलावा देश में पीने के भूजल, जीवित जैव विविधता के लिए किसी भी वेटलैंड भूमि के कुल 2.25 हेक्टेयर क्षेत्र में संरक्षण के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सख्त आदेश हैं। 23 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाला कालवन वेटलैंड संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश में शामिल करने के लिए हरियाणा राज्य सूची में शामिल होना है। इसलिए संबंधित कालवन पंचायत की ओर से अधिसूचना संरक्षण के लिए राज्य सूची में शामिल करने के लिए हरियाणा राज्य वेटलैंड प्राधिकरण में विवरण के साथ आधिकारिक रूप से मध्यस्थता करते हुए सूचना देनी चाहिए।
शीलकालीन प्रवासी पक्षियों की कुछ प्रजातियां अभी भी गर्मियों में मौजूद
जनवरी में दर्ज की गई शीलकालीन प्रवासी पक्षियों की कुछ प्रजातियां अभी भी गर्मियों में मौजूद है। जिनमें नॉर्दन शोवीलर, ब्लैक टेल्ड गोडविच, वुड सेंडपाईपर, रूफ व पाईड एवोसिट शामिल हैं। वहीं जो प्रवासी पक्षी सर्दियों में वेटलैंड में मौजूद नहीं थे। उनमें ग्रे लेग गीज, गर्गनी, मार्स सेंडपाईपर व लीटल स्टींट शामिल हैं। इन पक्षियों की संख्या कम होती जा रही है। उनमें इग्रेटस, हीरन्स, पेंटीड स्टोर्क, इंडियन स्पुट बिल्ड डक, पर्पल स्वेमफन शामिल हैं।