हरियाणा के जींद में 15 जून को ऑक्सीजन के अभाव में एंबुलेंस में हुई एक वर्षीय महेश की मौत के मामले में लगभग एक महीने बाद एबुलेंस के फ्लीट मैनेजर को एनएचएम मुख्यालय की तरफ से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा बायो मेडिकल इंजीनियर वरुण को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और भविष्य में ऐसी लापरवाही मिलने पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
कृष्णा कॉलोनी निवासी सुनील अपने एक वर्षीय बच्चे महेश को सांस लेने में परेशानी के चलते 15 जून को नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया था। यहां उसकी गंभीर हालत देख पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया था लेकिन थोड़ी दूरी पर जाने के बाद एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया और उस समय एंबुलेंस में ईएमटी भी तैनात नहीं था।
जब तक एंबुलेंस चालक सिलेंडर को बदलता तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिवार के लोगों ने सीएमओ को शिकायत दे कार्रवाई की मांग की थी। 17 जून को एनएचएम के एडमिन डायरेक्टर डॉ. बीके राजौरा, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सूबे सिंह व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्र अहलावत की तीन सदस्यीय टीम पहुंची और टीम ने बच्चे के पिता सुनील, एंबुलेंस ड्राइवर रामफल, रेफरल मैनेजर दिनेश के बयान कलमबद्ध किए थे। इसके बाद टीम वापस पंचकूला लौट गई और जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री को सौंप दी थी। अब इस मामले में सोमवार को रेफरल मैनेजर दिनेश कुमार को नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
एनएचएम मुख्यालय की तरफ से दिनेश कुमार की बर्खास्तगी के आदेश मिले थे। यह पत्र सोमवार को दिनेश कुमार को सौंप दिया गया। इसके अलावा बायो मेडिकल इंजीनियर वरुण को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
-डॉ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन।