एक ओर तो फसलों का मुआवजा लेने के लिए धरने और प्रदर्शन किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ खरेंटी निवासी किसान सूरजमल नैन ने बैंक खाते में मुआवजे के ज्यादा रुपये लौटाने के लिए छह साल से तहसील से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालयों तक के चक्कर काट चुका है। लेकिन उसका मुआवजा वापस लेने वाला कोई नहीं है।
सूरजमल नैन ने बताया कि 2014 में सफेद मक्खी के प्रकोप से कपास की फसल खराब हो गई थी। राजस्व विभाग ने खराब हुई कपास की फसल का मुआवजा सात हजार रुपये प्रति एकड़ दिया था। उसने कहा कि उसने अपनी 20 एकड़ में केवल दो एकड़ में ही कपास की फसल उगाई थी, बाकी में धान की रोपाई की थी। उस हिसाब से उसे केवल 14 हजार रुपये ही मुआवजा मिलना चाहिए था, लेकिन उसके खाते में 70 हजार रुपये आ गए थे। उसने तहसीलदार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि वह मुआवजे के रूप में आए 56 हजार अधिक रुपये को वापस करना चाहता है, लेकिन तहसीलदार ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उसने इसकी जानकारी डीसी को दी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद सूरजमल ने इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को भेजी। आज तक किसी भी अधिकारी ने पैसे वापस नहीं करवाए हैं।
मामला दबाने के लिए डाले गए अधिक पैसे
सूरजमल ने कहा कि 2014 में उसने खराब हुई फसलों के बांटे गए मुआवजे की जानकारी लेने के लिए आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। इस सूचना में नहरी व राजस्व विभाग का रिकार्ड मेल नहीं खा रहा था। इसी मामले को दबाने के लिए उसके खाते में 70 हजार रुपये डाले गए। वह अपने खाते में आए 56 हजार रुपये लौटाने के लिए संघर्ष कर रहा है लेकिन कोई भी अधिकारी इसे वापस करवाने में उसकी सहायता नहीं कर रहा है।