जींद। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने शुक्रवार को जुलहेड़ा गांव में खेत बचाओ अभियान एवं प्राकृतिक खेती जागरूकता अभियान के तहत जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल बचाने के प्रति जागरूक करना था।
डॉ. पुनीत ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार कम हो रही है और उत्पादन लागत बढ़ रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक प्रभावी एवं टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों जैसे बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया गया कि प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही रासायनिक अवशेषों से मुक्त गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन संभव है, जिससे उपभोक्ताओं को भी स्वस्थ भोजन उपलब्ध होता है।
उन्होंने बताया कि स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर उत्पादन का आधार है। उन्होंने किसानों से नियमित मृदा परीक्षण कराने, फसल अवशेषों को न जलाने तथा जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के अधिकाधिक उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि को सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के समान है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों तथा कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई। किसानों को बताया गया कि विभाग प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं जागरूकता कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन कर रहा है।