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Jind News: शिलान्यास के 37 साल बाद भी दिव्यांगों को नहीं मिला रिहैबिलिटी सेंटर, अस्पताल प्रशासन जमीन पर बना दी पार्किंग

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15जेएनडी38: नागरिक अस्पताल में पूर्व राज्यपाल एच ए बरारी द्वारा किया गया रिहेबिलिटी सेंटर का ​श
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जींद। नागरिक अस्पताल परिसर में दिव्यांगों के लिए प्रस्तावित रिहैबिलिटी सेंटर का सपना 37 साल बाद भी अधूरा है। जिस स्थान पर दिव्यांगों के उपचार और पुनर्वास के लिए सेंटर बनना था, वहां अस्पताल प्रशासन ने पार्किंग बना दी है। हैरानी की बात यह है कि जमीन स्वास्थ्य विभाग के नाम है या रेड क्रॉस के दोनों ही विभागों को पता ही नहीं।
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जानकारी के अनुसार, वर्ष 1989 में तत्कालीन राज्यपाल एचए बरारी ने दिव्यांगों के लिए रिहैबिलिटी सेंटर का शिलान्यास पत्थर लगाकर किया था लेकिन इसके बाद परियोजना फाइलों में ही सिमट कर रह गई। बीते 37 वर्षों में न तो दिव्यांगों को रिहैबिलिटी सेंटर की सुविधा मिल सकी और न ही प्रशासन ने इसके निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया।
उस समय उम्मीद जगी थी कि जिले के दिव्यांगों को एक समर्पित केंद्र मिलेगा। जहां उन्हें फिजियोथेरेपी, कृत्रिम अंग, पुनर्वास सेवाएं, काउंसलिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी लेकिन अस्पताल प्रशासन ने जमीन पर पार्किंग बना दी है। इससे न केवल दिव्यांगों के अधिकारों की अनदेखी हुई है बल्कि शिलान्यास के बाद भी निर्माण न होना प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े करता है।
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दिव्यांगों को इलाज के लिए शहर से बाहर जाना पड़ता है
अब संदेह और गहरा गया है कि क्या जानबूझकर दिव्यांगों के लिए प्रस्तावित जमीन पर कब्जा किया गया या फिर विभागीय तालमेल की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई। जिले में हजारों दिव्यांगजन हैं। जिन्हें नियमित उपचार और पुनर्वास सेवाओं की सख्त जरूरत है। रिहैबिलिटी सेंटर न होने के कारण उन्हें इलाज के लिए रोहतक, हिसार या चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता है। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि समय पर उपचार न मिलने से उनकी समस्याएं भी गंभीर हो जाती हैं।
जमीन के स्वामित्व को लेकर विभाग असमंजस में
मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि जमीन के स्वामित्व को लेकर खुद विभाग असमंजस में हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह जमीन अस्पताल परिसर का हिस्सा है जबकि रेड क्रॉस या संबंधित विभाग के अधिकारी स्पष्ट रूप से यह बताने में असमर्थ हैं कि भूमि उनके नाम दर्ज है या नहीं।
वर्जन
वर्ष 1989 के शिलान्यास से जुड़े दस्तावेज, भूमि आवंटन रिकॉर्ड और परियोजना फाइलों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि यहां पर रिहैबिलिटी सेंटर क्यों नहीं बना। यह प्रशासन की नाकामी को दिखाता है। यहां पर प्रशासन को रिहैबिलिटी सेंटर बनाना चाहिए, ताकि जिले के दिव्यांगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके। -कपूर सिंह, उपप्रधान विकलांग अधिकार मंच हरियाणा
वर्जन
अस्पताल में पार्किंग बनाई जा रही है। जहां पर रिहैबिलिटी सेंटर का पत्थर लगा है। लंबा समय बीतने के बाद भी यहां पर कोई योजना शुरू नहीं हुई। अब मरीजों की सुविधा के लिए पार्किंग बनाई जा रही है। जमीन की जांच करवाई जाएगी कि यह स्वास्थ्य विभाग के नाम है या रेड क्रॉस के। इसी के अनुसार इस पर आगे काम किया जाएगा।
-डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद
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रिहैबिलिटी सेंटर रेड क्रॉस कार्यालय में चलाया जा रहा है। यह योजना किन कारणों से पूरी नहीं हो पाई। यह जमीन किस विभाग के नाम है इसका पता करवाया जाएगा। -डाॅ. दिनेश, रिहैबिलिटी सेंटर इंचार्ज
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