फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जरूरतमंद बच्चों की मां-बाप बन जाती हैं डॉ. सीमा मलिक

विज्ञापन
विद्यार्थियों को पढ़ाते हुए डॉ. सीमा मलिक। फाइल फोटो - फोटो : Jind
विज्ञापन
जींद। बड़ौदा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अंग्रेजी की अध्यापिका डॉ. सीमा मलिक एक शिक्षक के रूप में ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए अभिभावकों की तरह काम करती हैं। स्कूल में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए वह मां-बाप का साया है। सीमा मलिक प्रतिवर्ष ऐसे बच्चों को निशुल्क कॉपी, किताब, स्टेशनरी, वर्दी, फीस का खर्च उठाती हैं। प्रति वर्ष 20 से 30 बच्चों की इस प्रकार से सहायता करती हैं।
विज्ञापन

इनके मार्गदर्शन में कई विद्यार्थियों ने लघु नाटिका, रागिनी, रोल प्ले एक्टिविटी, क्ले मॉडलिंग, पेंटिंग व लघु नाटिका में बीते वर्ष एससीईआरटी गुरुग्राम कला उत्सव कार्यक्रम में जिले से लेकर राज्य स्तर पर अपना स्थान बनाया है। इसके अलावा स्कूल में विद्यार्थियों के लिए खुद के खर्च पर ही अंग्रेजी लैब की स्थापना करवाई है। इस लैब में वह विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से अंग्रेजी पढ़ाकर उनके बेहतर भविष्य के लिए काम कर रही हैं।
इसके अलावा कोरोना महामारी में भी उन्होंने स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए पैर से चलने वाली सैनिटाइजर मशीन, सैनिटाइजर और मास्क लगातार वितरित करने का काम किया है। छात्राओं को अब तक चार हजार से ज्यादा सेनेटरी पैड भी वितरित कर चुकी हैं। छात्राओं के लिए फ्री सिलाई सेंटर भी स्थापित किया हुआ है। अपने इन बेहतर कार्यों के चलते डॉ. सीमा मलिक को कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
विज्ञापन

जरूरतमंदों की मदद के लिए हर समय आगे रहती हैं डॉ. सीमा
स्कूल में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ डॉ. सीमा छुट्टी के दिन या फिर स्कूल की छुट्टी होने के बाद सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जरूरतमंदों की सहायता भी शुरू कर देती हैं। इस दौरान वह केंद्र में जाकर सिलाई के बारे में जागरूक करने के अलावा महिलाओं को सेनेटरी पैड वितरित करने के लिए जागरूक करती हैं। चाहे जरूरतमंदों की सहायता के लिए अन्य प्रकार का सामान वितरित करना हो तो उसके लिए भी वे तैयार रहती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें