जींद। लोगों को जिलास्तर पर न्याय दिलवाने के लिए होने वाली जिला परिवेदना समिति की बैठक जींद में 23 महीने से नहीं हो पाई है। पहले कोरोना संक्रमण और फिर किसान आंदोलन के चलते इसका आयोजन नहीं किया जा सका। इससे लोगों की न्याय पाने की उम्मीदें अटकी हुई हैं। अब किसान आंदोलन समाप्त होने पर जल्द बैठक होने की उम्मीद है।
दरअसल जिला परिवेदना समिति की बैठक हर माह होनी होती है। इसमें ऐसे मुद्दों को रखा जाता है, जिनका समाधान प्रशासनिक स्तर पर नहीं हो पाया हो। प्रदेश सरकार के मंत्री जिला परिवेदना समिति के चेयरमैन होते हैं, ऐसे में समिति के चेयरमैन होने के नाते वे लोगों के काम नहीं करने वाले अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्तियां रखते हैं। ऐसे में लोगों को इस बैठक में आने वाले मुद्दों पर काफी उम्मीदें होती हैं। इस तरह की अंतिम बैठक 27 जनवरी 2020 को हुई थी। इसमें लंबित शिकायतों पर भी अभी तक विभागों ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इसमें 11 शिकायतों को लंबित छोड़ा गया था। अभी तक इन पर सुनवाई नहीं हुई है।
केस-एक
करीब दो साल पहले हुई बैठक में बराह कलां निवासी पूनम व अन्य लोगों ने गरीबी रेखा से नीचे होने के बावजूद राशन नहीं मिलने की शिकायत लगाई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि डिपो धारक उनको राशन नहीं देता। एतराज करने पर झगड़ा करता है। यह मामला बैठक में रखा गया और इसको अगली बैठक के लिए लंबित रखा गया, लेकिन इसके बाद मीटिंग ही नहीं हुई। पूनम के अनुसार परिवार में वह खुद, उनका पति व तीन बच्चे हैं। बड़ी मुश्किल से गुजारा होता है। अधिकारियों को शिकायत देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिला परिवेदना समिति की बैठक में समस्या का समाधान होने की उम्मीद थी, लेकिन यह मीटिंग भी नहीं हो पाई।
केस-दो
जिले के बहुचर्चित पेगां पैक्स घोटाले का मामला भी 27 जनवरी 2020 की बैठक में रखा गया था। इसमें सहकारिता मंत्री अनूप धानक के समयबद्ध तरीके जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद हालांकि इस मामले में करीब चार महीने पहले किसानों के बाउचर पर लगे अंगूठों के निशान के मिलान की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन इसका परिणाम अभी तक नहीं निकला है। शिकायतकर्ता सतबीर, श्रीपाल, अमरजीत व इंद्र के अनुसार इस मामले में प्रशासन लगातार टाल-मटोल कर रहा है। अभी तक कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
केस-तीन
बख्ता खेड़ा गांव निवासी जयबीर सिंह ने समाज कल्याण विभाग में दिव्यांग पेंशन के लिए आवेदन किया था। जुलाई 2019 में उनकी पेंशन तो बन गई, लेकिन खाते में नहीं आई। जयबीर सिंह का कहना है कि इसके उसने खाता नंबर भी ठीक करवा दिया, लेकिन पेंशन नहीं पहुंची। इसके चलते उसकी छह महीने की पेंशन अटकी हुई है। यह मामला भी मंत्री अनूप धानक के समक्ष रखा गया था, लेकिन अभी तक जयबीर सिंह की बकाया पेंशन नहीं मिली है।
हर बैठक में औसतन आती हैं 15 शिकायतें
नियमानुसार बैठक हर माह होनी चाहिए। अब तक हुई प्रत्येक बैठक में औसतन 15 शिकायतें आती हैं। इनमें से पांच-सात समस्याओं का समाधान मौके पर ही हो जाता है। अब पिछले 23 महीने से बैठक नहीं हो पाई है। ऐसे में 300 से अधिक शिकायतें अटकी पड़ी हैं।
सदस्यों के पास आ रहीं शिकायत
जिला परिवेदना समिति में विभागाध्यक्षों के साथ गैर सरकारी सदस्य भी होते हैं। इनमें अधिकतर सदस्य सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता व नेता होते हैं। ऐेसे में लोग इन सदस्यों के पास अपनी शिकायत लेकर जा रहे हैं, लेकिन बैठक नहीं हो पाने के कारण समस्याएं दूर नहीं हो रही हैं।
आज अधिकारियों से करूंगा बात
जिला परिवेदना समिति के सदस्य रामफल शर्मा ने कहा कि मुझे मंगलवार को चंडीगढ़ जाना है। वहां अधिकारियों के साथ बारे में बात की जाएगी। जल्द ही जिला परिवेदन समिति की बैठक करवाई जाएगी, ताकि लोगों की लंबित शिकायतों का समाधान हो सके।
जल्द तय की जाएगी बैठक की तारीख
जिला परिवेदना समिति के सदस्य डॉ. ओपी पहल ने कहा कि हां बैठक नहीं हो पाई है। हिसार जिले की मीटिंग भी तय हुई है, ऐसे में अब जींद की मीटिंग भी तय करवाई जाएगी। इसके लिए अधिकारियों से बात की जाएगी।
कार्यालय से ली जाएगी जानकारी
सीटीएम रमीत सिंह ने कहा कि मैं अभी नया आया हूं, मुझे जानकारी नहीं है कि जिला परिवेदना समिति की बैठक की क्या स्थिति है। मंगलवार को कार्यालय में पता किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।