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दिन हॉस्टल में और रात बीत रही बंकर में

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जींद। चार दिन से यूक्रेन में रूसी सेना की कार्रवाई जारी है। ऐसे में यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों के परिजनों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। हालांकि छात्र मोबाइल व वीडियो कॉल से परिजनों से संपर्क बनाए हुए हैं, लेकिन परिजनों ने कहना है कि बच्चे सहमे हुए हैं। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने सभी बच्चों को घर के अंदर ही रहने की सलाह दी है। डैनिपर में मौजूद जींद जिले के करीब 15 विद्यार्थी रात और दिन हॉस्टल में ही बिता रहे हैं। दिन के समय उनका हॉस्टल के बेसमेंट में ठिकाना रहता है और रात को बच्चे बंकरों में शरण ले लेते हैं। हालांकि कुछ बच्चे रोमानिया के रास्ते स्वदेश वापसी के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।
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घंटाघर चौक पर डिस्पोजल गिलास-प्लेट की दुकान चलाने वाले कृष्ण वत्स का बेटा सिद्धार्थ वत्स यूक्रेन में फंसा हुआ है। कृष्ण वत्स ने बताया कि उनका बेटा पहले ही यूक्रेन से निकलना चाहता था, लेकिन शिक्षण संस्थानों ने इसकी अनुमति नहीं दी। अब युद्ध शुरू हो गया है तो बच्चे को निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी प्रकार रोहतक रोड चौड़ी गली के पास रहने वाले सुरेंद्र मुगिल का बेटा सचिन भी यूक्रेन के डैनिपर में है। सुरेंद्र के अनुसार डैनिपर में जींद जिले के काफी बच्चे हैं। फिलहाल इन विद्यार्थियों को हॉस्टल में ही खाना दिया जा रहा है, लेकिन युद्ध को लेकर बच्चे सहमे हुए हैं।
रोमानिया के लिए रवाना हुए 50 से अधिक लोग
युद्ध के बीच फ्रंको सिटी से 50 से अधिक भारतीय विद्यार्थियों का दल रोमानिया के लिए रवाना हुआ है। इसमें जींद निवासी सिद्धार्थ भी शामिल है। परिजनों के मुताबिक सिद्धार्थ रोमानिया सीमा से करीब 900 किलोमीटर की दूरी से चले हैं। रोमानिया पहुंच कर उन्हें हवाई यात्रा की सुविधा मिलेगी।
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परिजन बोले, सरकार करे गंभीर प्रयास
यूक्रेन में फंसे जींद के रोहतक रोड निवासी सिद्धार्थ, सचिन, शिव कॉलोनी निवासी शिवम व नरवाना निवासी लीना के परिजन काफी परेशान हैं। परिजनों का कहना है कि उनके बच्चों ने बताया है कि रात-रात भर बमबारी की आवाजें आती रहती हैं। आसपास के कई भवनों पर बम गिरे हैं।
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