परिवार पहचान पत्र का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है। डेढ़ माह पहले डीआरडीए हाल में चुनिंदा वीएलई को साक्षात्कार के लिए बुलाया था। ऐसे में ब्लॉक स्तर पर एक जोनल इंचार्ज की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया के लिए एक खंड से पांच वीएलई को बुलाया गया था और पूरे ब्लॉक के लिए एक जोनल हेड को चुना भी गया लेकिन चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए वीएलई ने आरोप लगाए है कि प्रशासन द्वारा बिना किसी विज्ञापन के चयन प्रक्रिया की। वीएलई ने मांग की है कि चयन प्रक्रिया के अनुसार प्रतिभागियों की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव की जानकारी दी जाए। इसके अलावा पद के लिए कितने प्रतिभागियों के भाग लिया, जिन प्रतिभागियों को निरस्त किया गया उनके कारण भी बताए जाएं। गत दिनों परिवार पहचान पत्र के मामले में बड़ा मामला सामने आया था। लगातार परिवार पहचान पत्र में बदलाव के लिए मोटी रकम वसूलने की शिकायतें मिल रही थी। ऐसे में प्रशासन द्वारा अभियान चलाते हुए एक आरोपी का पकड़ा भी गया था। धीरे धीरे ऐसे मामले लगातार उजागर हो रहे हैं।
कम अनुभव वाले व्यक्ति का हुआ चयन
लजवाना कलां निवासी दीपेंद्र ने बताया कि जो जोनल हेड चुना गया है उससे उसका अनुभव भी ज्यादा है शैक्षणिक योग्यता भी ज्यादा है और सीएससी की ट्रांजेक्शन भी काफी हैं। उसने परिवार पहचान पत्र के मामले में काफी अपडेट किए हैं। इसके बावजूद भी उसे पद से बिना कारण बताए महरूम रखा गया है। वहीं दूसरे वीएलई किलाजफरगढ़ निवासी दीपक ने आरोप लगाया कि उन्हें भी बिना कारण बताए पद से महरूम रखा गया है। शादीपुर सीएससी के संचालक विकास ने बताया कि वह ट्रांजेक्शन के मामले में सबसे ज्यादा काम करता है। उसे तो साक्षात्कार के लिए भी नहीं बुलाया गया। सीएससी संचालक अब सीएम विंडो पर शिकायत देंगे।
सभी जोनल हेड के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता से की गई है। 13 युवाओं के नाम चयनित करके मुख्यालय भेजे थे। साक्षात्कार के लिए टीम बनाई गई थी। हर ब्लॉक के पांच टॉपर वीएलई को बुलाया गया था जो चयनित हुआ उसका नाम आगे भेजा गया है।
-मुकेश तंवर, प्रोजैक्ट अधिकारी, जींद।