प्रश्न पत्र हल करने की एवज में उम्मीदवारों से पांच से सात लाख रुपये लिए जाते हैं। फर्जीवाड़ा करने वाला सबसे अधिक राशि सॉल्वर पर खर्च करता है। इसके लिए पांच-छह सॉल्वर जुटाए जाते हैं, जो 10-15 मिनट में ही प्रश्न पत्र को हल कर दें। प्रश्न पत्र की आंसर-की उम्मीदवार को परीक्षा समाप्त होने से कुछ समय पहले दी जाती है।
महज दस मिनट में ही यह पूरा खेल कर दिया जाता है। आंसर-की उम्मीदवारों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दूसरे लोगों की होती है। इसके लिए गूगल से लेकर पुस्तकों की भी मदद ली जाती है। इन विशेषज्ञों के 90 प्रतिशत तक उत्तर सही होते हैं। इसके बाद कोड के अनुसार आंसर-की तैयार कर भेज दी जाती है।
अभी प्रारंभिक सूचना के आधार पर कार्रवाई की है। तीन लोगों को पकड़ा है। जिस घर में कार्रवाई हुई, वहां हवन भी करवाया गया था। पता किया जा रहा है कि कौन-कौन लोग इसमें शामिल थे। जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। - जितेंद्र खटकड़, डीएसपी उचाना।