नगरपरिषद के बाहर टेंडर नहीं लिए जाने की जानकारी देते ठेकेदार।
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नगर परिषद द्वारा स्कीम नंबर पांच-छह में साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च कर बनने वाली गलियों के टेंडर को लेकर एक ठेकेदार ने अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं। ठेकेदार का कहना है कि टेंडर की अंतिम तारीख 21 मई दोपहर एक बजे तक की गई थी, लेकिन उनका टेेंडर नहीं लिया गया। हालांकि कार्यकारी अधिकारी एसके चौहान ने इन आरोपों को नकार दिया है। इसकी शिकायत डीसी को दी गई है।
डीसी को दी शिकायत में एचकेएस फर्म के सदस्य राजेश ने कहा कि उनकी फर्म नगर परिषद में कार्य करती रही है। अब स्कीम नंबर पांच-छह में विशेष कार्य के लिए नगर परिषद ने टेंडर लगाया हुआ है। यह टेंडर 14 मई 2020 को मांगा गया और इसके लिए टेंडर 21 मई 2020 को दोपहर एक बजे तक जमा करवाना था। इसके लिए वे लोग सुबह 11 बजे ही पहुंच गए, लेकिन डाक लेने वाला कर्मचारी सीट पर नहीं मिला। अन्य कर्मचारियों ने टेंडर के कागजात लेने से मना कर दिया। इसके बाद यह लोग कार्यकारी अधिकारी के पास भी तीन बार गए, लेकिन उन्होंने भी टेंडर के कागजात नहीं लिए। इस पर 12:31 बजे उन्होंने ई मेल से नगर परिषद को टेंडर पत्र भेज दिया। राजेश कुमार के अनुसार इसके बाद वे फिर से 12:50 बजे कार्यकारी अधिकारी के पास गए, लेकिन इसकी पावती देने से मना कर दिया गया।
इन लोगों ने आशंका जताई है कि यह सब उनके टेंडर रद्द करने के लिए किया गया है, ताकि बहुत ही अधिक रेट पर यह टेंडर दिया जा सके। ऐसे में डीसी से मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है।
संज्ञान में नहीं है मामला
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हो सकता है कार्यालय में शिकायत दी गई हो। इसका पता करवाया जाएगा। यदि कोई गड़बड़ी है तो इसे ठीक करवाया जाएगा।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
यह लोग बिना बात ही विवाद बना रहे हैं। टेंडर लेकर दोपहर एक बजे के बाद यह लोग आए हैं। जिस समय यह आए, वह समय लिखकर टेंडर लिया गया है। हालांकि दूसरी पार्टी भी विरोध कर रही है कि समय के बाद टेंडर नहीं लिया जाना चाहिए। तकनीकी रूप से जांच कर इस पर फैसला लिया जाएगा।
एसके चौहान, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगरपरिषद।