जींद। नागरिक अस्पताल में लगभग दो वर्ष से बगैर किसी अनुमति के अवैध रूप से चल रही कैंटीन को स्वास्थ्य विभाग ने बंद करा दिया है। इसके लिए न तो कोई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी और न ही कोई नियम बनाया गया था। अब टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद टेंडर के बाद कैंटीन खोली जाएगी। कैंटीन बंद होने से मरीजों और उनके तीमारदारों परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पीएमओ डॉ. लोकवीर ने सिविल सर्जन से टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।
लगभग दस वर्ष पहले नागरिक अस्पताल के शव गृह के पास स्वास्थ्य विभाग ने अपने खर्चे पर कुछ दुकानें बनवाई थीं। पहले इनमें कुछ मेडिकल स्टोर खोले गए थे। सरकार ने जब मेडिकल स्टोर को बंद करने के निर्देश दिया तो यहां मेडिकल स्टोर बंद कर दिये गए। इसके बाद यहां एक चाय की दुकान खोली गई। इसके लिए भी कोई टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। दो वर्ष पहले यहां पर कैंटीन खोली गई थी। यह कैंटीन किसी की सिफारिश से ही खोली गई थी। जब स्वास्थ्य विभाग को पता चला कि इस कैंटीन के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है तो पीएमओ डॉ. लोकवीर ने इस कैंटीन को बंद करवा दिया। उन्होंने कहा कि यहां पर मरीजों व उनके तीमारदारों की सुविधा के लिए कैंटीन जरूरी है। अब कैंटीन के लिए पूरी तरह से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी तथा बाकायदा किराया भी स्वास्थ्य विभाग लेगा। उन्होंने कहा कि कैंटीन की प्रक्रिया का सारा कार्यालय सिविल सर्जन के अधीन आता है। इसलिए उनको पत्र लिखकर यहां पर कैंटीन खोलने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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दुकानेें किराये पर देने की प्रक्रिया होगी शुरू
शवगृह के पास नागरिक अस्पताल परिसर में लगभग छह दुकानें हैं। इनमें से एक दुकान में सीएससी (कामन सर्विस सेंटर) तथा एक में आधार कार्ड सेंटर खोला गया है। इसके अलावा दो दुकानों में कैंटीन खुली थी। दो दुकानों में वैसे ही लोग बैठते हैं। जिस समय इनमें दवा की दुकानें खुली थीं, उस समय इनसे किराया लिया जाता था लेकिन उसके बाद आज तक इन दुकानों को किराये पर देने की प्रक्रिया नहीं हुई। अब स्वास्थ्य विभाग इन सभी दुकानों को किराये पर देने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
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जब कैंटीन के बारे में पता किया तो इसके संबंध में कोई दस्तावेज नहीं मिला। इसके चलते कैंटीन को बंद करा दिया गया है। सिविल सर्जन डॉ. मंजू कादियान को पत्र लिखकर टेंडर प्रक्रिया शुरू करके दुकान को कैंटीन के लिए किराये पर देने की बात कही गई है। यह सिविल सर्जन के अधिकार क्षेत्र में है। यदि वे चाहेंगी तो वह खुद इस प्रक्रिया को शुरू कर देंगे और दुकान के लिए किराया के साथ दूसरे सभी नियम लागू किए जाएंगे। -डॉ. लोकवीर, पीएमओ।