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Jind News: भगवान राम की चरण पादुका सिर पर रख लौटे भरत

Sun, 28 Sep 2025 08:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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27जेएनडी28 :अपने सिर पर राम की खड़ाऊ उठाकर ले जाते हुए भरत । स्रोत आयोजक।
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नरवाना। हुडा ग्राउंड में श्री भारतीय कला केंद्र की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के छठे दिन भरत मिलाप का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस प्रसंग को देखकर दर्शक भावुक हो उठे और पंडाल में जयकारों की गूंज सुनाई दी। मंचन के दौरान हजारों की संख्या में दर्शक मौजूद रहे। छठे दिन के मंचन की शुरुआत कैकेयी महल और कौशल्या महल के प्रसंग से हुई।
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इसमें दिखाया गया कि पिता दशरथ के निधन के बाद भरत सबसे पहले मां कैकेयी के पास पहुंचते हैं और राम के बारे में पूछते हैं। कोई स्पष्ट उत्तर न मिलने पर वह कौशल्या महल जाते हैं जहां कौशल्या उन्हें पूरी सच्चाई बताती हैं कि राम, सीता और लक्ष्मण वनवास के लिए चले गए हैं।
यह सुनकर भरत व्याकुल हो उठते हैं और राम को अयोध्या लौटाने का निश्चय करते हुए वन की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। जंगल में लंबी यात्रा के बाद भरत का राम से मिलाप हुआ। भरत ने बार-बार निवेदन किया कि राम अयोध्या लौट चलें, परंतु राम ने पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए 14 वर्षों तक वनवास पूर्ण करने तक लौटने से मना कर दिया।
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भावुक भरत ने भगवान राम के खड़ाऊं अपने सिर पर धारण किए और अयोध्या लौटकर उन्हें सिंहासन पर स्थापित किया। इस भावुक प्रसंग को देखकर पूरा पंडाल श्रद्धा और भावनाओं में डूब गया।

इस मौके पर मुख्य अतिथि बाबा के भी साहिब मंदिर के महंत अजय गिरी महाराज ने रामलीला का शुभारंभ किया। विशेष अतिथि अमित ढाकल (चेयरमैन, मार्केट कमेटी), सुरेंद्र (सरपंच मंडल अध्यक्ष), रमेश आर्य और नवीन गोयल (अध्यक्ष, सनातन धर्म मंदिर) को मंच पर सम्मानित किया गया।
वहीं ब्रह्माकुमारीज आश्रम से आईं बहन सीमा और सामाजिक संस्था भारत विकास परिषद को भी आयोजकों ने सम्मानित किया। पंडाल की सुरक्षा का जिम्मा विश्व हिंदू सेना ने संभाला। वहीं भारतीय कला केंद्र के संस्थापक रामकुमार गर्ग, रामनिवास जैन, ज्ञाना राम शमा, उपेंद्र गर्ग सहित सभी केंद्र के सदस्य आयोजन में मौजूद रहे।

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इन कलाकारों ने निभाए किरदार

मंचन के दौरान कौशल्या की भूमिका अनुराग शर्मा, कैकेयी की हरीश गुप्ता, मंथरा की लक्ष्य गोयल, भगवान राम की तरसेम मित्तल, लक्ष्मण की कमल मोयल, सीता की श्रवण नायक, भरत की प्रमोद सिंगला, शत्रुघ्न की पार्थ शांडिल्य और अन्य पात्रों की भूमिका स्थानीय कलाकारों ने निभाई। मंचन में नगरवासियों व दरबारियों की भूमिका मुकुल, साहिल, प्रिंस, लव्य गोयल, एकांत, गर्वित, खुश, लक्ष्य, देव और जयंत ने जीवंत कर दी।
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