जींद के गांव निडानी की 19 वर्षीय बेटी अंशु मलिक भले ही इस बार ओलंपिक में पदक नहीं जीत पाई लेकिन उनके प्रदर्शन से परिवार व गांव के लोग काफी प्रभावित हैं। अंशु के पिता धर्मबीर मलिक ने कहा कि कोरोना काल में अंशु की बढ़ियां तैयारी नहीं हो पाईं। जिन पहलवानों से उसका मुकाबला हुआ, वे काफी अनुभवी थीं। इतनी कम उम्र में ओलंपिक में हिस्सा लेना बहुत ही गर्व की बात है। अगले ओलंपिक में अंशु स्वर्ण पदक जरूर लेकर आएगी। कुछ दिन आराम के बाद अंशु अगले ओलंपिक के लिए तैयारी करना शुरू कर देगी।
अंशु मलिक 57 किलोग्राम भार वर्ग में कुश्ती की खिलाड़ी हैं। उनका इस बार ओलंपिक में दो पहलवानों से मुकाबला हुआ लेकिन वह हार गईं। अंशु ने 13 वर्ष की आयु में ही कुश्ती में अपना दम दिखाना शुरू कर दिया था।
पिता धर्मबीर मलिक ने कहा कि वह छह एकड़ जमीन के मालिक हैं। सिर्फ खेती के सहारे बच्चों को पहलवान बनाना बहुत मुश्किल है। ओलंपिक के लिए सिर्फ दूध-घी से काम नहीं चलता। अच्छा प्रशिक्षण, माहौल व बाहर जाने के लिए बच्चे पर करीब एक लाख रुपये महीना खर्च होते हैं। इसके बावजूद वह अपनी बेटी के लिए काफी कुछ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगले ओलंपिक में उनकी बेटी देश के लिए स्वर्ण पदक जरूर लाएगी। इतनी छोटी उम्र में पहले ओलंपिक में इतना शानदार प्रदर्शन यह साबित करता है कि अंशु काफी अच्छी पहलवान बनेगी और देश का गौरव जरूर बढ़ाएगी।
अंशु मलिक की अब तक उपलब्धियां
- एथेंस में 4 से 10 सितंबर 2017 तक आयोजित विश्व कैडिट चैंपियनशिप में स्वर्ण
- आगरा में 7 से 15 मई 2017 तक आयोजित विश्व खेल स्कूल चैंपियनशिप में स्वर्ण
- थाईलैंड में 20 से 23 जुलाई 2017 तक आयोजित एशिया कैडिट कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य
- 2016 में ताईवान में आयोजित एशिया कैडिट कुश्ती चैंपियनशिप में रजत
- 2016 में जार्जिया में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य
- 10 से 13 मई 2018 को एशियन सब जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण
- 18 से 23 सितंबर तक तरनाया में आयोजित विश्व जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य
- 3 से 8 जुलाई 2018 को आयोजित विश्व सब जूनियर (कैडिट) चैंपियनशिप में कांस्य
- 15 से 18 फरवरी 2020 को रोम में आयोजित विश्व रैंकिंग कुश्ती चैंपियनशिप में रजत
- 18 से 20 फरवरी 2020 को दिल्ली में आयोजित सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य
- 12 से 18 दिसंबर तक बेलग्रेड में आयोजित सीनियर वर्ल्ड कप रेसलिंग चैंपियनशिप में रजत पदक