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जुम्मा के पिता की मौत के बाद ग्रामीण जुम्मा को बनाना चाहते थे चौकीदार

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डिडवाड़ा गांव में घटना पर चर्चा करते ग्रामीण। - फोटो : Jind
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पांच बच्चों की हत्या का जुम्मादीन द्वारा जुर्म कुबूलने के बाद से डिडवाड़ा के ग्रामीण अपने आपको शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहा है कि उनके गांव का नाम ऐसे मामले में उछला है कि उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही है। हर गली-चौराहे पर जुम्मा की करतूत की ही चर्चा हो रही है।
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गांव डिडवाड़ा में रविवार को अफवाह फैली की जुम्मा की पत्नी ने बेटे को जन्म दिया है। बाद में पता चला कि अभी तक डिलिवरी नहीं हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि इस घटना के बाद से युवक नहर में नहाने के लिए नहीं जा पा रहे हैं। अभिभावकों ने बच्चों को नहर पर जाने से पूरी तरह से रोक दिया है। दिन ढलने के बाद अभिभावक बच्चों को घर से नहीं निकलने देते हैं। कुछ लोग तो अपने बच्चों पर इतनी निगरानी रखते हैं कि कहीं उनका बच्चा इधर-उधर तो नहीं घूम रहा। करीब 4800 वोटों वाले गांव डिडवाड़ा के 50 घरों के 200 वोट मुस्लिम समुदाय के हैं।
गांव में चर्चा कर रहे ईश्वर दत्त, भूलन, उदय सिंह नंबरदार, सत्यवान व राजींद से अमर उजाला ने बातचीत की तो उन्होंने कहा कि जुम्मा का पिता बारू गांव का चौकीदार था। गांव में दोनों धर्मों के लोगों में कभी भी ऐसा नहीं महसूस हुआ कि वे अलग धर्म समुदाय से हैं। करीब आठ माह पहले जुम्मा के पिता बारू (80) का निधन हो गया था। लोगों ने जुम्मा को ही चौकीदार बनवाने की योजना बनाई थी। इससे पहले ही जुम्मा की यह करतूत सामने आ गई है। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें कभी भी ऐसा नहीं लगा कि जुम्मा के अंदर इतना बड़ा शैतान छुपा है।
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गांव के लिए कलंक है जुम्मा
उदय सिंह नंबरदार, सत्यवान व ईश्वर सिंह ने कहा कि ऐसा व्यक्ति पिता के नाम पर कलंक है। साथ ही इससे पूरे गांव की भी बदनामी हुई है, इसलिए उसको गोली मारने या फांसी देने से बढ़िया है कि जेल में डाल दिया जाय ताकि तड़प-तड़प कर मरे।
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