नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस।
- फोटो : Jind
नियमों का पालन नहीं करते हुए नागरिक अस्पताल में रखे गए एंबुलेंस चालकों को अब दो जुलाई को जांच कमेटी के सामने हाजिर होना है। चालकों को अपने वास्तविक कागजातों को लेकर आना है। इसमें आउटसोर्स एजेंसी के ठेकेदार व सुपरवाइजरों समेत फ्लीट मैनेजर को भी बुलाया गया है। कमेटी अब एंबुलेंस चालकों के वास्तविक कागजातों का मिलान करेगी। इसके बाद ही अपनी जांच रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंपेगी।
जानकारी के लिए अप्रैल में नागरिक अस्पताल में आउटसोर्स का ठेका मयंक मैनपावर को दिया गया है। अस्पताल में आउटसोर्स के तहत दस एंबुलेंस चालकों की नियुक्ति की जानी थी। मयंक मैनपावर कंपनी ने दस एंबुलेंस चालकों की नियुक्ति कर दी। जिस समय एंबुलेंस चालकों की नियुक्ति की गई थी उस समय उनका मेडिकल नहीं करवाया गया था। नियमों के अनुसार एंबुलेंस चालक के पास तीन साल पुराना हैवी ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। इसके अलावा आवेदक दसवीं पास होना चाहिए। कलर ब्लाइंड नहीं होना चाहिए। भर्ती के समय इन चालकों का कोई मेडिकल नहीं करवाया गया। अब इस मामले की जांच शुरू हुई तो इनका मेडिकल भी करवाया गया। जांच कमेटी को यह पता चला है कि दो चालकों के पास जो ड्राइविंग लाइसेंस है, वह एक साल पुराना है, जबकि इनके पास तीन साल पुराना लाइसेंस होना चाहिए था। अब जांच कमेटी ने सभी दस चालकों को अपने वास्तविक कागजातों के साथ दो जुलाई को पेश होने के लिए कहा है। इसमें कागजातों का मिलान किया जाएगा। कमेटी के सामने आउटसोर्स एजेंसी के ठेकेदार, सुपरवाइजर तथा फ्लीट मैनेजर को भी आना होगा।
मामले की जांच चल रही है। दो जुलाई को सभी चालकों के वास्तविक कागजातों का मिलान किया जाएगा। इसके लिए सभी को अपने वास्तविक कागजातों के साथ बुलाया गया है।
डॉ. राजेश भोला, जांच अधिकारी।