उचाना में स्थित नागरिक अस्पताल। संवाद
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उचाना कलां तथा आसपास के गांवों की दो लाख की आबादी का उपचार उचाना के नागरिक अस्पताल में होता है। लेकिन चिकित्सकों की कमी की वजह से लोगोें को उपचार करवाने में दिक्कत आ रही है। यहां दस चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन इस अस्पताल को संभालने वाला केवल एक ही चिकित्सक है। दिन में दो बजे तक अस्पताल खुलता है। उसके बाद बंद कर दिया जाता है, क्योंकि रात को इमरजेंसी सेवाएं देने वाला कोई चिकित्सक नहीं है। उचाना कलां से खुद उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला विधायक हैं। डेढ़ वर्ष पहले उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन आज तक यहां एक भी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
पहले उचाना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र था। छह वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने इसे 50 बेड के नागरिक अस्पताल का दर्जा दिया था। इसके बाद यहां पर लगभग दस करोड़ रुपये की लागत से भवन बनाया गया। तीन वर्ष पहले अस्पताल बनकर तैयार हो गया, लेकिन आज तक इसमें एक भी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अस्पताल को केवल डॉ. सुशील गर्ग अकेले संभालते हैं। दिन में वह ओपीडी करते हैं। रात में अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं देने वाला कोई चिकित्सक नहीं है। जब भी डॉ. सुशील गर्ग छुट्टी पर होते हैं तो ओपीडी नहीं हो पाती।
इस अस्पताल में एक एसएमओ, आठ मेडिकल अधिकारी तथा एक दंत चिकित्सक का पद स्वीकृत है। लेकिन यहां केवल एक मेडिकल ऑफिसर ही तैनात है। उनको इस अस्पताल का इंचार्ज बनाया गया है। उचाना के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 300 लोगों की ओपीडी है। इसके बावजूद यहां किसी भी अन्य चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है।
उपमुख्यमंत्री ने मांगी थी रिपोर्ट
जनवरी 2020 में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने उचाना के नागरिक अस्पताल समेत इस विधानसभा क्षेत्र के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की रिपोर्ट मांगी थी। इसमें कितने चिकित्सक तैनात हैं, कितने पद खाली हैं तथा क्या-क्या सुविधाएं हैं, इन सभी का ब्योरा जिला स्वास्थ्य विभाग से मांगा था, लेकिन आज तक उचाना विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाओं में कोई सुधार नहीं हो पाया है।
समय-समय पर चिकित्सकों के खाली पदों के बारे में स्वास्थ्य निदेशालय को अवगत करवाया जाता है। उचाना के नागरिक अस्पताल के लिए भी चिकित्सकों की डिमांड भेजी गई है। जल्द ही कुछ चिकित्सकों की नियुक्ति की उम्मीद है। -डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन