11जेएनडी01-नरवाना क्षेत्र में रात के समय गेहूं के अवशेषों में लगाई जा रही आग। संवाद
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जींद। जिला में दिन और रात के समय गेहूं के अवशेषों में आग लगाई जा रही है। इससे जहां पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, वहीं स्मॉग के कारण दृश्यता कम होने से सड़कों पर आने-जाने वाले वाहनों को परेशानी हो रही है। साथ ही दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। इसको लेकर कृषि विभाग को सैटेलाइट के माध्यम से अब तक 63 जगह आग लगने की लोकेशन मिल चुकी है। अब कृषि विभाग अवशेष जलाने वाले किसानों पर मुकदमा दर्ज कर जुर्माना लगाने की तैयारी में है।
गेहूं के अवशेष जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। साथ ही यह किसानों के लिए भी नुकसानदेह है, क्योंकि इससे उनकी आगामी फसल पर भी असर पड़ता है। गेहूं की कटाई पूरी कर चुके किसान अब अवशेषों को बेखौफ आग के हवाले कर रहे हैं। अवशेषों की आग में जिला प्रशासन के आदेश भी स्वाह हो रहे हैं।
वहीं पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है। बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारी कोर्ट के आदेशों की पालना करने की अपेक्षा घटनाओं को अनदेखा कर रहे हैं। किसान अवशेषों को कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में प्रयोग करने की बजाए आग के हवाले कर रहे हैं। अवशेषों से उठती लपटों से कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म होने के अलावा करोड़ों किसान मित्र व दुर्लभ जीव भी आग की भेंट चढ़ रहे हैं। हालांकि इसको लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने गेहूं के अवशेष जलाने पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। हालात यह है कि अदालत के आदेशों के बावजूद भी गेहूं के अवशेषों में आग लगाई जा रही है।