फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में डीएपी खाद के 27 हजार बैग उपलब्ध

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश के कई जिलों में डीएपी खाद की कमी के चलते किसान परेशान हैं। वहीं जींद जिले में डीएपी के 27 हजार बैग उपलब्ध हैं। डीएपी की कालाबाजारी रोकने के लिए उप कृषि निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक व जिला गुणवत्ता नियंत्रक डॉ. नरेंद्र पाल ने खाद विक्रेताओं के साथ मीटिंग की। कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कोई भी विक्रेता तय कीमत से अधिक पर किसानों को डीएपी नहीं बेचे। इसके अलावा डीएपी के साथ जबरन अन्य कोई भी सामान नहीं दे। यदि इसकी शिकायत मिलती है तो विभाग कार्रवाई करेगा।
विज्ञापन

जिला गुणवत्ता नियंत्रक डॉ. नरेंद्रपाल ने बताया कि जिले में 25 अक्तूबर के बाद गेहूं की बिजाई शुरू होती है। इसके लिए फिलहाल 27 हजार बैग डीएपी उपलब्ध है। अलग-अलग विक्रेताओं के पास यह स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि शुरुआती समय के लिए यह स्टॉक पर्याप्त है। इसके बाद नवंबर के पहले सप्ताह में पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि कहीं अफवाह नहीं होनी चाहिए कि खाद की कमी है। जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है।
साढ़े चार लाख बैग होती है जरूरत
जिले में करीब ढाई हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई होती है। इसमें करीब साढ़े चार लाख डीएपी की जरूरत होती है। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारी यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि गेहूं की बिजाई के समय से पहले यह खेप उपलब्ध हो जाए।
विज्ञापन

सरकारी स्टॉक में नहीं है डीएपी
हालांकि निजी विक्रेताओं के पास डीएपी की उपलब्धता है, लेकिन सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं मिल रहा है। इसके लिए हैफेड द्वारा बिक्री केंद्र तो खोले गए हैं, लेकिन यहां डीएपी नहीं है। इसके अलावा गांवों में सहकारी बैंक के केंद्रों पर भी खाद नहीं है।
जिले में डीएपी का स्टॉक समिति है, लेकिन किल्लत नहीं है। फिलहाल जिले में डीएपी की जरूरत नहीं है। सरसों की फसल में डीएपी की जरूरत नहीं होती है और गेहूं की बिजाई अभी हो नहीं रही है। ऐसे में कुछ लोग दूसरे जिलों को देखते हुए पहले ही स्टॉक कर रहे हैं। ऐसे मेें एक किसान को पांच बैग डीएपी देने की व्यवस्था की गई है। इसके बाद अगले महीने डीएपी पहुंच जाएगा।
विज्ञापन

- डॉ. नरेंद्रपाल, जिला गुणवत्ता नियंत्रक, कृषि विभाग।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें