बारिश से छह मकानों की छतें गिरीं, घरों और सरकारी दफ्तरों में घुसा पानी
रविवार को रात-दिन व सोमवार को दिनभर हुई बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त,
लोगों को याद आई 1995 की बाढ़, सिविल लाइन पुलिस थाना व बस स्टैंड में पानी घुसा
धान और कपास की फसलों को नुकसान की संभावना, मौसम विभाग ने अभी दो दिन और बारिश की जताई संभावना
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। दो दिन से हो रही बारिश अब लोगों के लिए आफत बन गई है। रविवार को पूरी रात और सोमवार को दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही। लगातार बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है और लोगों को 1995 के दिनों में आई बाढ़ की याद आने लगी है। लोग सहमे नजर आ रहे हैं। जिलेभर में कई जगहों पर मकान गिरने की खबर है, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं हैं।
स्थानीय दुर्गा की कॉलोनी में तीन मकानों की छत गिर गई। गिरने वालों में अधिकतर कच्चे मकान है। छतों के गिरने से घर में रखा सामान खराब हो रहा है। क ई मकानों की दीवारों में दरार आ गई। विकास नगर में भी एक मकान बारिश के कारण गिर गया। बारिश की वजह से शहर के हालात काफी खराब हो रहे हैं। सरकारी कार्यालय से लेकर सिविल लाइन थाने तक में बारिश का पानी घुस चुका है। प्रशासन के बारिश के बचाव के तमाम इंतजाम फेल साबित हुए।
जींद बस स्टैंड पर हालात ये है कि यात्री बस पकड़ने के लिए बस स्टैंड के अंदर जाने के बजाय बाहर ही बस का इंतजार कर रहे हैं । सिविल लाइन थाने में तो पुलिस कर्मियों ने बारिश का पानी अंदर आने रोकने के लिए मिट्टी के कट्टे भी लगाए, लेकिन यह इंतजाम फेल साबित हुए। वहीं लगातार दो दिन से हो रही बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है, किसानों की कपास की फसल खराब हो गई। मौसम विभाग के अनुसार अभी राहत के कोई आसार नहीं है, अगले दो दिन लगातार तेज बारिश के आसार बने हुए हैं।
जिलेभर में बारिश के आकड़े
ब्लॉक बारिश एमएम
जींद 83
नरवाना 38
सफीदों 102
उचाना 19
जुलाना 101
पिल्लूखेड़ा 100
इन जगहों पर हुआ जलभराव
शहर के रोहतक रोड, रानी तालाब, पटियाला चौक, दुर्गा कॉलोनी, विकास नगर, शर्मा कॉलोनी, भटनागर कॉलोनी, बिसंबर नगर, गुरुद्वारा कॉलोनी, चौड़ी गली, राम कॉलोनी, रामबीर कॉलोनी, शीतलपुरी कॉलोनी, राजनगर, दया बस्ती व जोगिंद्र नगर में जलभराव रहा है। इससे लोगों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
गिर गई छत
रविवार की रात तेज बारिश के कारण मकान की छत गिर गई। पहले तो छत से बारिश का पानी आने लगा। इससे घर के बाकी सदस्य दूसरे कमरे चले गए। फिर एकदम से छत गिर गई। इससे बड़ा हादसा बच गया। प्रशासन से मांग है कि मुआवजा दिया जाए।
सुभाष, दुर्गा कॉलोनी।
पूरा मकान ही गिर गया
तेज बारिश में पूरा मकान गिर गया। अब किराए के मकान में जाना पड़ रहा है। रविवार को देर रात जब तेज बारिश से मकान के सभी सदस्य घर के बाहर निकले ही थे तो मकान गिर गया। इससे काफी नुकसान हो गया।
अंजू, दुर्गा कॉलोनी निवासी।
बॉक्स
बारिश से हुआ काफी नुकसान
तेज बारिश से मकान गिर गया और अंदर रखा सामान भी खराब हो गया। इससे काफी परेशानी हो रही है। मकान में परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए। प्रशासन से मांग है, कि जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।
संगीता, विकास नगर।
बारिश के मौसम में कपास की फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है। किसान सबसे पहले तो पानी निकासी का प्रबंध कर ले। अगर ये संभव नहीं है तो एक एकड़ कपास की फसल में तीन किलो सल्फर का प्रयोग करें।
आजाद शर्मा, किसान एक्सपर्ट।
दुर्गा कॉलोनी में एक मकान गिरने की सूचना मिली थी, जिसका दौरा किया गया। अगर किसी नुकसान हुआ है, तो तहसील कार्यालय में अपनी समस्या दर्ज करवा सकता हैं। उसका समाधान किया जाएगा।
प्रवीण कुमार, तहसीलदार जींद।
जींद। गांव लोहचब में अवैध निमार्णों के चलते गांव की गलियों एवं घरों में पिछले तीन दिन से लगातार हो रही बारिश का पानी भर रहा है। कई मकानों को भी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि वह इसकी शिकायत डीसी व सीएम विंडो पर भी कर चुके हैं, लेकिन इसके पश्चात भी कोई हल नहीं निकला है। गांव की गलियों व घरों में जलभराव होने के कारण विशेषकर छोटे बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों को पेरशानी हो रही है। भारी जल भराव खेतों में भी पहुंच गया है जिस कारण उनकी फसल में भी भारी नुकसान हुआ हैं। इससे किसानों ने प्रशासन व सरकार से मुआवजे की मांग की।
बारिश ने आलन जोगी खेड़ा में उजाड़ा दो परिवारों का आशियाना
बारिश से आलन जोगी खेड़ा में दो परिवारों के आशियाने गिर गए। इनमें एक मकान में तीन बच्चे बारिश की वजह से अंदर बैठे । उनकी माता कृष्णा देवी पशुओं को चारा डालने के लिए बाहर थी। इसी दौरान मकान की छत गिर गई मगर बच्चों का बचाव हो गया। हादसे में एक दस वर्षीय लड़की कोमल से सिर में हल्की चोट आई है, जबकि अन्य दो बच्चे उनकी मां कृष्णा देवी ने आकर सुरक्षित निकाले। इसमें घर के अंदर रखा सामान दब गया। इसी गांव के रमेश का बरामदा गिर गया जिससे कई पशुओं को चोट पहुंचने के साथ ही एक कटड़ी मलबे के नीचे दबने से मर गई। इस दौरान पशुपालक रमेश बरामदे से पानी टपकने की वजह से घर जाकर कुछ ही समय पहले सो गया था। बरामदा गिरने की जानकारी मिलने पर आसपास के लोगों ने पशुओं को मुश्किल से बाहर निकाला। दोनों मकान मालिकों कृष्णा देवी और रमेश ने बताया कि बारिश से उनका आशियाना उजड़ गया है। इसके लिए उन्होंने प्रशासन से आर्थिक सहायता मांगी है।
पिल्लूखेड़ा में भारी बरसात से जन जीवन अस्त व्यस्त
पिल्लूखेड़ा। बरसात से पिल्लूखेड़ा में भी जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भारी बरसात से सड़के और गलियों ने तालाब का रूपधारण कर लिया है। भारी बरसात से किसानों को धान की फसल के खराब होने की चिंता सताने लगी है। कालवा गांव के किसान रामदिया, सुंदर, अजय, साहिल, बिजेंद्र और जामनी गांव के दलशेर रिटौली से डॉ. विजय लोहान, पिल्लूखेड़ा से नरेंद्र कुंडू ने बताया कि यह भारी बरसात धान की फसल के लिए ज्यादा नुकसानदायक है। किसानों का कहना था कि यदि ऐसे ही बरसात होती रही तो 1995 की बाढ़ के हालात बन सकते हैं। वही इस बरसात से पिल्लूखेड़ा मंडी में सोमवार को कम ही दुकानें खुलीं। पिल्लूखेड़ा मंडी में कई दुकानों में बरसाती पानी घुस गया। भारी बरसात के चलते लोगों के घरों की छतें टपकने लगीं। लोग सुबह ही पॉलिथिन को खरीदने के लिए दुकानों की ओर दौड़ पड़े।
शामलो कलां-पडाना-रामकली ड्रेन ओवरफ्लो होकर टूटी, फसल हुई जलमग्न
जुलाना। जुलाना क्षेत्र में सोमवार सुबह सात बजे से तीन बजे तक 42 एमएम बारिश हुई। रविवार रात को क्षेत्र में 59 एमएम बारिश हुई। जोरदार बारिश से शामलो कलां-पडाना-रामकली ड्रेन ओवरफ्लो होकर टूट गई। ड्रेन का पानी फसलों में घुसने से फसल जलमग्न हो गई। पसानी गांव की गलियां तक पानी पहुंचने के साथ लोगों के घरों में घुस गया। सुंदर ब्रांच नहर पर बने पंप हाउस पर ट्रांसफार्मर जलने व बिजली के संकट से शामलो कलां गांव में स्थिति भयानक हो गई है। कपास व बाजरे की फसल बर्बाद हो गई है। अब संकट धान व ईंख पर मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर प्रशासन सही समय पर 24 घंटे बिजली देकर पंप हाउस का जला हुआ ट्रांसफार्मर रखवा देता तो फसल डूबने की नौबत नहीं आती। प्रशासन की बेरुखी से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति रोष पाया जा रहा है।
फसलों को हुआ नुकसान
भारी बारिश के चलते फसलों को नुकसान हुआ है। धान व बाजरे की फसल पक रही है। अब इस फसल के गिरने का डर है। कुछ जगह फसल गिर चुकी है। कपास की फसल में भी पानी ठहरने से नुकसान होने की आशंका है। संभव हो सके तो किसान खेत का पानी निकाल दें।
पुरुषोत्तम, एडीओ कृषि विभाग जुलाना।
बिघाना में स्कूल का भीगा रिकॉर्ड, नगूरां के संदीप और डाहौला के सुरेंद्र का गिरा मकान
अलेवा। क्षेत्र में पिछले लगातार दो दिनों से हो रही तेज बारिश किसानों व ग्रामीणों के लिए आफत बनकर बरस रही है। लगातार हो रही बारिश का पानी बिघाना के राजकीय हाई स्कूल, दिल्लूवाला के राजकीय प्राथमिक पाठशाला के अलावा बिघाना निवासी सत्यवान सिंह, नगूरां निवासी संदीप, डाहौला निवासी सुरेंद्र सिंह तथा बलवान का मकान गिर गया है। गनीमत रही कि मकान गिरने से किसी जान माल का नुकसान नहीं हुआ है। मकान गिरने से मकान मालिकों को हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। बिघाना व अलेवा गांव की वाल्मीकि बस्ती के समीप वाले तालाब ओवरफ्लो होने से बारिश व गलियों की निकासी का गंदा पानी भरकर बस्ती की गलियों से होते हुए घरों तक आ पहुंचा है। रविवार रात को हुई तेज बारिश का पानी बिघाना गांव के राजकीय हाई स्कूल के मुख्याध्यापक कार्यालय में भरने के कारण इसमें रखी अलमारी का रिकार्ड भी भीग गया है। सरपंच राजकुमार ने बताया कि स्कूल के चौकीदार की लापरवाही के कारण कमरों में पानी भरने से स्कूल का रिकार्ड पानी में भीग गया है।
किसानों ने की 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग
जींद। हरियाणा सहित पूरे उत्तर भारत में पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश ने आसन गांव सहित अन्य गांव के किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। इस बारिश से किसानों द्वारा छह महीने की कड़ी मेहनत से तैयार की गई फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। किसानों ने सरकार से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। पिछले तीन दिनों से पूरे उत्तर भारत में तेज हवा के साथ मुसलाधार बारिश हो रही है। जिससे जिले के गांव आसन सहित अन्य गांव के किसानों की परेशानी कम होने की बजाय ज्यादा बढ़ गई है। किसानों द्वारा कड़ी मेहनत करके तैयार की गई धान, कपास व बाजरा सहित अन्य फसलें नष्ट हो चुकी हैं। किसान हरदीप, विजय, हरिकिशन, रामभज, ओमप्रकाश, अजीत, धर्मबीर, पाला, दिलबाग, होशियारा, संदीप इत्यादि ने बताया कि धान की फसल पकने वाली थी और पहले कम बारिश होने के कारण उन्होंने फसल को तैयार करने में काफी खर्चा किया हुआ था। जिससे उनके ऊपर कर्ज का बोझ ओर बढ़ गया था। लेकिन अब लेट हुई भारी बारिश ने उनके सब सपनों पर पानी फेर दिया है। क्योंकि ज्यादा बारिश होने व तेज हवाओं के कारण धान की फसल जमीन पर पसर गई है। जिससे धान की फसल में अब भूसे के अलावा कुछ नहीं बचा है। जिससे वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। उन्होंने सरकार से खराब हुई फसलों की जल्द से जल्द गिरदावरी करवाकर पचास हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है।
इनेलो किसान सेल के प्रदेश महासचिव बिजेंद्र लोहान ने बताया कि किसानों की छह महीने की कमाई पर पानी फिर गया है। सरकार अगर किसान हितैषी है तो वह जल्द से जल्द गिरदावरी करवाने के आदेश दे और किसानों को 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने की घोषणा करे। अगर सरकार ने किसानों को मुआवजा नहीं दिया तो इनेलो सड़कों पर उतरकर किसानों के हकों की लड़ाई लड़ेगी।