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झज्जर अस्पताल में डॉक्टरों के बिना ‘बेकार’

Sat, 19 Oct 2013 09:25 PM IST
झज्जर/ब्यूरो
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कांग्रेस के पूर्व विधायक हरि राम वाल्मीकि के 17 वर्षीय घायल पोते सुमित को बीते वीरवार रात को सड़क दुर्घटना के बाद समुचित उपचार नहीं मिलने का मामला सामने आने के बाद हरियाणा के झज्जर की सिविल अस्पताल प्रबंधन की कलई खुल गई है।
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सिविल अस्पताल में डाक्टरों की कमी मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है। खासकर रात के समय हादसे के मरीजों को समय पर उपचार न मिलने से जान पर बन आती है। प्रदेश सरकार को अस्पताल में डॉक्टरों के रिक्त पदों को जल्द भरने की जरूरत है।

गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व विधायक हरिराम वाल्मीकि ने जिला अस्पताल के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे।

वे दुलीना के पास हुई सड़क दुर्घटना में घायल अपने बेटे और पोते का इलाज करवाने के लिए वीरवार रात लगभग दस बजे सरकारी अस्पताल में आए थे, लेकिन उन्हें वहां काफी देर तक कोई डॉक्टर नहीं मिला।
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हरियाणा सरकार के मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जाकर उनके 17 वर्षीय पोते सुमित व ड्राइवर हरीश का इलाज हो सका, वहीं डॉक्टरों ने उनके 40 वर्षीय बेटे सतीश वाल्मीकि को मृत घोषित कर दिया था।

पूर्व विधायक ने डॉक्टरों के इस रवैये की शिकायत शिक्षामंत्री गीता भुक्कल को भी की थी, जिस पर उन्होंने जांच का आश्वासन दिया है।

 हालांकि अब पूर्व विधायक के पौत्र की हालत में सुधार है। डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी है।

डॉ. अंबेडकर मिशनरीज इंप्लाइज स्टूडेंट्स एंड डिप्राइवड पीपुल्स सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. गुलशन ने सरकार से डॉक्टरों की तुरंत नियुक्ति करने की मंाग की है।

उनका कहना है कि डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को परेशानी होना स्वाभाविक है। झज्जर के सिविल अस्पताल का दर्जा बढ़ा दिए जाने के बाद डॉक्टरों की निरंतर कमी बनी है।

लंबे समय से यहां डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग की जाती रही है। डॉ. गुलशन ने कहा कि डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं,  दिक्कतें हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि दिन में ड्यूटी करने के बाद रात में भी लगातार ड्यूटी करना संभव नहीं रहता। उन्होंने कहा कि झज्जर अस्पताल में क्लास फोर और स्वीपर का ठेका भी 25 अक्तूबर को खत्म हो रहा है, यदि प्रशासन ने पहले व्यवस्था नहीं की तो अस्पताल में एक सप्ताह बाद नई परेशानी हो सकती है।

प्राइवेट डॉक्टर से कराया उपचार
पूर्व विधायक के पोते सुमित का उपचार परिजनों ने एक प्राइवेट हड्डी रोग विशेषज्ञ से करवाया। अस्पताल प्रशासन की ओर से पीजीआई रेफर किए जाने के बावजूद परिजनों ने प्राइवेट चिकित्सक से एक्सरे करवाकर शनिवार को प्लास्टर चढ़वाया।

इस पर भारी-भरकम राशि भी खर्च करनी पड़ी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सिविल अस्पताल से मरीज को रेफर करने की व्यवस्था ही है।

सरकारी अस्पताल में सरकार उच्च शिक्षित डॉक्टरों की नियुक्ति करती है और उन पर भारी-भरकम वेतन खर्च करती है। पूर्व विधायक के अनुसार अब उनका पोता घर पर है और डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी है।

शोक व्यक्त करने वालों का लगा रहा तांता
शनिवार के दिन आमतौर पर शोक व्यक्त करने के लिए लोग नहीं आते मगर पूर्व विधायक के यहां उनके पुत्र सतीश के निधन पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा।

पूर्व स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के उपाध्यक्ष मगनेश चंद जैन के अलावा झज्जर, रोहतक और गांवों से भारी संख्या में ग्रामीण शोक व्यक्त करने के लिए पहुंचे।
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