अपने नेताओं की बात का समर्थन करती किसान महिलाएं। संवाद
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बहादुरगढ़। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) की नया गांव चौक के पास मंगलवार को हुई सभा की कमान महिलाओं के हाथों में रही। महिला किसान नेता सभा के मंच से बसताड़ा-करनाल प्रकरण को लेकर हरियाणा सरकार पर बरसीं।
किसान नेता राज कौर कोटदुन्ना और अमरजीत कौर बड़बर ने बसताड़ा टोल पर एसडीएम ने किसानों के सिर फोडने के आदेश हरियाणा सरकार के इशारे पर दिए। लेकिन ये किसानों की एकता का ही परिणाम है कि लाठीचार्ज करवाने वाली सरकार को झुकना ही पड़ा। महिला नेताओं ने कहा कि यह दिल्ली की सीमाओं पर किसान मोर्चा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि हरियाणा के लोग भी अब पंजाब के किसान संगठनों से शांति से लडना और जीतना सीख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां के सत्ता दलों को इस बात पर शर्म आनी चाहिए कि हमारे पढ़े-लिखे युवा जिन्होंने कई डिग्रियां हासिल की हैं, स्थायी रोजगार के अभाव में खेतों में जीरी लगा रहे हैं।
जसवंत कौर शेखा और गुरजीत कौर भट्टल ने कहा कि किसान संघर्ष ने हमें अपने और पराए की पहचान सिखाई है। हमारे हितों का वादा करने वाले दलों ने हम पर गलत कानून थोप दिए हैं। असलियत ये है कि सियासी दलों का कोई स्टैंड नहीं होता। संदीप कौर पट्टी सेखवां और बलवंत कौर भोटना ने कहा कि सरकारें दमन कर रही हैं लेकिन हम सब कुछ धैर्य के साथ सह रहे हैं। हमारे इतिहास ने दिखाया है कि हमारे गुरुओं ने दमनकारी राजाओं का अंधा दमन सहन किया है। उन्होंने कहा कि तब भी झांसी की रानी, माई भागो, गदर बीबी गुलाब कौर सहित कई महिलाओं ने उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष का झंडा बुलंद किया था। आज भी महिलाएं पुरुषों के बराबर के संघर्ष में भाग ले रही हैं।
लखबीर कौर धनोला और बिंदरपाल कौर भदौर ने कहा कि सत्ताधारी दलों ने हमारी छवि खराब करने की कोशिश की, लेकिन हम इसे खराब नहीं होने देंगे। हमें सरकारों द्वारा लाई गई जनविरोधी नीतियों की समझ है। चुनाव के समय साम्प्रदायिकता का कार्ड खेलकर, हमें धर्म, जाति और कबीले में बांटकर, हमारा वोट हासिल करके हमें लूटने वाले कानून बनाते हैं। चरणजीत कौर भदौर, हरजिंदर कौर फाजिल्का, कुलवंत कौर धनोला, हरबंस कौर भोटना, ताजा बेगम कोटदुन और गुरमीत कौर दासका ने भी मंच से संबोधित किया।