सरकार के खिलाफ रोष जताते किसान संसद के प्रतिनिधि किसान।
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संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन से जुड़े किसान नेता स्वर्ण सिंह, थाना सिंह और महिला किसान सुमन ने वीरवार को जंतर मंतर पर किसान संसद की कार्रवाई में भाग लिया। एमएसपी को कानूनी दर्जा देकर फसल खरीद की गारंटी सुनिश्चित करने के विषय पर चर्चा हुई।
किसान संसद में भाग लेते हुए किसान नेता स्वर्ण सिंह ने कहा कि खेती में लागत लगातार बढ़ती जा रही है। हर वर्ष खाद, बीज, कीटनाशक, औजार व डीजल आदि के रेट बढ़ जाते हैं। इनकी मूल्य वृद्धि पर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है, क्योंकि इनका उत्पादन कॉरपोरेट घराने करते हैं, जो अपने उत्पादन के दाम खुद तय करते हैं। लेकिन किसान जो फसल पैदा करता है उसके दाम पूंजीवादी बाजार तय करता है। सरकार एमएसपी की केवल घोषणा करती है और पंजाब, हरियाणा आदि कुछ क्षेत्रों से धान व गेहूं की उस एमएसपी पर खरीद कर लेती है। लेकिन बाकी देश में और बाकी फसलें इस एमएसपी से बहुत कम दामों में मजबूरी वश किसानों को बेचनी पड़ती हैं। किसानों की लंबे समय से मांग है कि उन्हें सी-2 फार्मूले के आधार पर लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए और इस घोषित एमएसपी पर उनकी फसल खरीद की गारंटी दी जाए।
किसान नेता थाना सिंह ने कहा कि लागत ज्यादा और आमदनी कम होने से किसान साल दर साल कर्ज जाल में फंसते चले जाते हैं। प्राकृतिक आपदा से फसलें नष्ट हो जाती हैं, उन्हें मुआवजा भी नहीं मिलता। यदि मिलता है तो नाममात्र का। इस तरह कर्ज के जाल में फंस कर काफी संख्या में किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
महिला किसान नेता सुमन ने कहा कि खेती में महिला किसानों का बड़ा योगदान है। सारा साल कठोर मेहनत करने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं बचता। घर का गुजारा नहीं चलता। बच्चों को पढ़ा नहीं सकतीं, इलाज के पैसे नहीं। क्या करें, मजबूरी में हमें सड़कों पर उतरना पड़ा है। सरकार कॉरपोरेट जगत के हित में ये काले कानून लाई है जिनसे बची खुची आय है, वह भी खत्म हो जाएगी। उन्होंने किसान संसद के माध्यम से सरकार से मांग की कि एमएसपी पर फसल खरीद का कानून बनाकर उनकी फसल खरीद की गारंटी दी जाए और इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए।