बहादुरगढ़। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिन्दर सिंह उगराहां ने कहा कि तीन कृषि कानूनों की वापसी होना किसानों की बड़ी जीत है और बाकी मांगों के संबंध में आंदोलन का रूप व दिशा बदली भी जा सकती है। लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य समेत हमारी बाकी तमाम मांगें कायम रहेंगी। यह बातें उन्होंने वीरवार को आंदोलनकारियों के टीकरी बार्डर पड़ाव में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।
किसान आंदोलन में सबसे अधिक लोगों की भागीदारी वाले संगठन भाकियू एकता (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिन्दर सिंह उगराहां ने कहा कि हम एक साल पहले कानून वापसी की मांग लेकर टीकरी बार्डर आए थे। ये हमारी सबसे बड़ी मांग थी। अब हमारी बड़ी जीत हो गई है। लेकिन घरों को वापस चले जाएंगे तो भी एमएसपी, बिजली बिल, लखीमपुर प्रकरण व पराली आदि से संबंधित हमारी मांगें बरकरार रहेंगी और इन मांगों के लिए आंदोलन जारी रहेगा। ये जरूरी नहीं कि दिल्ली के बार्डर पर ही मोर्चा रख रखकर लड़ाई लड़ें। आंदोलन का रूप अलग हो सकता है। इस संबंध में फैसला शनिवार 27 नवंबर को सिंघू बार्डर पर होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की केंद्रीय कमेटी की बैठक में लिया जाएगा। सरकार को इन मांगों पर बातचीत तो करनी ही होगी।
दिल्ली के बार्डरों से चले जाने के बाद बाकी मांगों को लेकर आंदोलन के दूसरे रूप के संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि देश का किसान अब जाग चुका है। राष्ट्रीय संगठन फिर आवाज लगाएंगे तो पीछे नहीं रहेंगे। 29 के दिल्ली मार्च के संबंध में भी अंतिम निर्णय उक्त बैठक में एसकेएम लेगा।
फिलहाल एमएसपी मिलना मुश्किल, पर कायम रहेगी मांग
उन्होंने कहा कि कानून वापसी से किसान खुश हैं, लेकिन अपने घर जाने के लिए उतावले नहीं हैं। हमारी बाकी मांगों के संबंध में पुख्ता उम्मीद होने से पहले वापस नहीं जाएंगे। एमएसपी की मांग कानूनों से भी बड़ी है। इसके अलावा नए बिजली बिल व पराली आदि के संबंध में एसकेएम द्वारा लिखी गई चिट्ठी का जवाब प्रधानमंत्री व सरकार को देना ही होगा। पूरे देश में सभी फसलों के लिए एमएसपी की गारंटी वाला कानून बनने की व्यवहारिकता के संबंध में उन्होंने माना कि यह काम सबसे मुश्किल है। हो सकता है इस बार हो भी नहीं। एमएसपी लागू करने के तरीके सुझाने के सवाल पर उगराहां ने कहा कि रास्ते निकालने का काम सरकार का है, हमारा नहीं। हमें इस पर दिमाग लड़ाने की जरूरत नहीं है। सरकार के पास हर तरह के माहिर लोग हैं। हम खेती को घाटे से निकाल मुनाफे वाली बनाना चाहते हैं। सरकार एमएसपी नहीं देना चाहती तो खेती के उपकरण, डीजल, बिजली, खाद, बीज और दवाओं के रेट आधे कर दे।
बातचीत किए बिना ही घोषणा पर जताई आपत्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानून वापस लेने की एकतरफा घोषणा करने पर उगराहां ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसानों का कथित सम्मान करने वाले मोदी ने किसानों से इस संबंध में सलाह मशविरा भी नहीं किया। वर्ष 2014 के बाद धारा 370, और नोटबंदी की तरह ही एकाएक टीवी पर आकर इसकी घोषणा कर दी। उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि लोग बड़े होते हैं, कुर्सी वाला बड़ा नहीं होता। किसान आंदोलन को कुछ लोगों का कहने को गलत बताते हुए उगराहां ने कहा कि यह भ्रम मई तक टूट जाएगा कि ये आंदोलन पूरे देश का रहा है या यहीं।